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इस मामले में भी हिन्दुओं से आगे मुस्लिम

Thu, 27 Aug 2015 08:17 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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धार्मिक आधार पर जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद देश भर में विभिन्न धर्मों की जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार पर नए सिरे से बहस शुरू हुई है। बहस मुख्य रूप से धर्मविशेष की जनसंख्या में हुई बढ़ोत्तरी पर हो रही है।
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हालांकि धर्म आधारित जनसंख्या के आंकड़े से इस बात का भी खुलासा हुआ है कि बेटी बचाने के मामले में देश के मुसलमान हिंदुओं की तुलना में काफी आगे हैं।

इसका अंदाजा इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि जहां मुसलमानों में लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है, वहीं हिंदुओं में राष्ट्रीय औसत से कम। वर्ष 2001-2011 के आंकड़ों केमुताबिक मुसलमानों में लिंगानुपात प्रति हजार पुरुष पर 951 है।

मुसलमानों से धीमी है गति

यह वर्ष 2011 के प्रति हजार पुरुष पर 940 महिलाओं केअनुपात के राष्ट्रीय औसत से 11 अधिक है। खास बात यह है कि वर्ष 1991-2001 से वर्ष 2001-2011 केबीच मुसलमानों में लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 936 से बढ़ कर 951 हुई है।

इस दौरान हालांकि हिंदुओं के लिंगानुपात में भी अपेक्षाकृत सुधार हुआ है, मगर इसकी रफ्तार मुसलमानों के मुकाबले बहुत धीमी है। मसलन वर्ष 1991-2001 से वर्ष 2001-2011 के बीच हिंदुओं में लिंगानुपात प्रति हजार पुरुष पर 931 से बढ़ कर 939 तक पहुंच पाई है, जो कि राष्ट्रीय औसत से एक कम है।

इसके अलावा हिंदुओं के मुकाबले मुसलमानों में बाल मृत्यु दर भी कम है। इसे भी मुसलमानों की जनसंख्या में बढ़ोत्तरी का एक कारण माना जा रहा है।
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दर्ज की गई कमी

धार्मिक आधार पर जनगणना के आंकड़े से यह तथ्य भी सामने आया है कि जिस रफ्तार से मुसलमानों की जनसंख्या वृद्घि दर में कमी आ रही है, उस हिसाब से हिंदुओं जनसंख्या वृद्घि दर कम नहीं हो रही।

मुसलमानों में जनसंख्या वृद्घि रफ्तार में कमी का सिलसिला अगर इसी तरह बदस्तूर जारी रहा तो वर्ष 2050 तक हिंदु और मुसलमानों की जनसंख्या वृद्घि दर एक समान हो जाएगी। वर्ष 1981-1991 के जनगणना के दौरान दोनों धर्मों के बीच जनसंख्या वृद्घि में रफ्तार का अंतर वर्ष 2001-2011 के दौरान 10.2 फीसदी से घट कर 7.84 फीसदी पर आ गया है।

उल्लेखनीय है कि इस अवधि के दौरान जहां हिंदुओं में जनसंख्या वृद्घि दर में 6 फीसदी की कमी आई, वहीं मुसलमानों की जनसंख्या दर में इसी अवधि में करीब 8.5 फीसदी की कमी दर्ज की गई
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