तरक्की के लिए कदम से कदम मिला कर रफ्तार से चलना होगा। यह न हो सका तो कोई भी क्षेत्र हो, उसमें हम पिछड़ ही जाएंगे। यह बात उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने सोमवार को एएमयू के कैनेडी सभागार में कही। वह यहां नवनिर्मित प्रो. केए निजामी कुरानिक स्टडी सेंटर का उद्घाटन करने आए थे। एएमयू के कुलपति रहे चुके अंसारी ने कहा कि मुसलमानों को आत्मनिरीक्षण कर विचार करने की जरूरत है कि किस प्रकार वह विभिन्न समुदायों वाले समाज में रहकर स्वयं में अधिक से अधिक दक्षता हासिल कर सकते हैं। मुसलमानों को समाज में अपना वाजिब हक मांगना चाहिए रियायत नहीं। अधिकार मिलने से आत्मसम्मान मिलता है।
इससे पहले उपरष्ट्रपति का काफिला दोपहर 1.01 बजे कुरानिक स्टडी सेंटर पहुंचा। यहां पर कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) जमीरउद्दीन शाह ने उनका स्वागत किया। अंसारी के साथ उनकी पत्नी सलमा अंसारी भी थीं। उपरष्ट्रपति ने फीता काटकर सेंटर का उद्घाटन किया और 20 मिनट तक सेंटर का भ्रमण किया। कैनेडी हॉल में अपने संबोधन में अंसारी ने कहा कि एएमयू का यह कुरानिक स्टडी सेंटर विश्व में अलीगढ़ की नुमाइंदगी करेगा।
उन्होंने कहा कि अलीगढ़ वालों ने बहुत कुछ किया लेकिन अभी बहुत कुछ और कर सकते हैं। पर लगता है गुणवत्ता और दक्षता के प्रति हमारी लगन कम हो गई है। अपने कुलपति कार्यकाल की एक घटना का जिक्र भी उन्होंने किया। उस वक्त एएमयू की जामा मसजिद के बाहर कुछ छात्रों से उन्होंने कहा था कि वजू, वक्त की पाबंदी और सफ में खड़े रहने का अनुशासन, यह तीनों बातें मसजिद के अंदर हो सकती हैं तो मसजिद के बाहर क्यों नहीं हो सकतीं।
इससे पहले अध्यक्षता करते हुए कुलपति जमीरउद्दीन शाह ने कहा कि इस संस्था की सभ्यता के पीछे सर सैयद की मूल भावना साकार हुई है। सर सैयद देश में धार्मिक मूल्यों के साथ-साथ वैज्ञानिक चेतना जागृत करना चाहते थे। सेंटर के निदेशक प्रो. एहतिशाम निजानी ने कहा कि पूर्व वीसी महमूद उर रहमान के समय इस सेंटर की आधारशिला रखी गई थी। लेकिन डॉ. अंसारी ने अपने कुलपतित्व काल में इस सेंटर की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाई। रजिस्ट्रार ग्रुप कैप्टन (रिटायर्ड) शाहरूख शमशाद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन शारिक अकील ने किया। इस मौके पर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री बलराम यादव और नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री इकबाल महमूद भी मौजूद थे।