हालिया विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद अब कांग्रेस को नई चिंता सताने लगी है।
समलैंगिक रिश्तों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की निराशा मुस्लिम समुदायों को खलने लगी है।
कुछ मुसलमान नेताओं ने राहुल और सोनिया की इस पहल की कड़ी आलोचना की है। इन नेताओं का कहना है कि कहीं कांग्रेस अगले लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र में धारा-377 को एक हिस्सा न बना ले।
आम आदमी पार्टी की कोर कमिटी के सदस्य इल्यास अज्मी ने कहा, 'राहुल गांधी कांग्रेस के एजेंडे पर खुद को अधिक तरजीह दे रहे हैं। यहां तक कि पार्टी बहुमत की राय को भी अनदेखा कर रही है।'
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भाजपा नेता एमजे खान ने कहा 'मुस्लिम समुदाय समलैंगिक मुद्दे पर बीजेपी के साथ है। राजनाथ सिंह एकमात्र शख्स हैं जिन्होंने इस मुद्दे पर अपनी साफ राय रखी, वहीं दूसरे लोग कई तरह की बातें कर रहे हैं।'
मुस्लिम नेताओं ने कहा कि होमोसेक्सुलिटी प्रकृति और भारतीय संस्कृति के खिलाफ है।
वहीं एमएम मजहरी ने कहा कि समलैंगिक संबंध सभी मजहब के मूल्यों के विरूद्ध है। इनमें हिंदू, इस्लाम, ईसाई, बौद्ध, जैन और यहूदी भी शामिल हैं।
नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी के अरशद खान ने कहा कि यदि कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदलने की कोशिश करेगी तो मुसलमान 2014 के लोकसभा चुनाव में उसे कड़ा सबक सिखाएंगे।
हाल ही में केंद्र सरकार ने समलैंगिक संबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर की है।