दंगे ने भले ही सहारनपुर के माथे पर कलंक लगा दिया हो, लेकिन ऐसे तनाव के माहौल में भी इंसानियत जिंदा रही।
सांप्रदायिक सौहार्द की मिशाल पेश करते हुए एक हिंदू परिवार ने तीन मुस्लिम लड़कियों को न सिर्फ अपने घर में महफूज रखा बल्कि उनके लिए सहरी और रोजा इफ्तारी का खास इंतजाम भी किया।
सोमवार को कर्फ्यू में ढील दिए जाने पर दंपति, लड़कियों को छोड़ने भी पहुंचा। शनिवार को हुए दंगे ने जान-माल के अलावा सांप्रदायिक सौहार्द को भी काफी नुकसान पहुंचाया।
दंगों के बीच सौहार्द की मिसाल पेश की
कुछ लोग जहां समाज को बांटकर तनाव बढ़ा रहे हैं, वहीं कुछ ने सौहार्द की मिसाल भी पेश की। बड़गांव रोड स्थित गांव अंबेहटा चांद में विजडम वैली स्कूल चलाने वाले एक दंपति अशोक तंवर और अनीता तंवर ने भी ऐसा ही उदाहरण पेश किया।
उनके स्कूल में शहर के मोहल्ला छीपियान की शबीना, हिरन मारान की अर्शी और बेहट अड्डे के पास की रहने वाली सुमायला उनके स्कूल में टीचर हैं। शनिवार सुबह स्कूल वैन से अंबेहटा चांद पहुंचीं।
शहर में दंगे की खबर आते ही स्कूल की छुट्टी कर दी गई, लेकिन बाद में कर्फ्यू लगने से तीनों लड़कियां अपने घर नहीं पहुंच सकीं।
पहली बार दंगा और कर्फ्यू झेला
इस पर स्कूल की प्रिंसिपल अनीता तंवर और उनके पति अशोक तंवर ने उनके परिजनों को सूचित कर उन्हें घर पर ही रोक लिया है। दंगे से सदमे में आई शबीना, अर्शी और सुमायला ने बताया कि उन्हें परिजनों की चिंता सताती रही।
अशोक तंवर ने बताया कि इन लड़कियों ने जीवन में पहली बार दंगा और कर्फ्यू झेला है। अपनों की सुरक्षा को लेकर वह भारी तनाव में रहीं। मोबाइल पर लगातार परिजनों से संपर्क से उन्हें थोड़ी राहत मिलती रही।
तीनों लड़कियों ने बताया कि कर्फ्यू में फंसे होने के बावजूद उनके रोजे और इबादत में कोई रुकावट नहीं आई। दंपति ने उनकी सहरी और इफ्तारी का खास ख्याल रखा। इसके चलते उन्हें मजहबी परंपरा को निभाने में कोई परेशानी नहीं हुई।