मुस्लिम समुदाय में बदलाव की बयार दिखने लगी है। अमूमन पुरुष ही कारी बनते थे, लेकिन अब लड़कियां भी कारी बनने में दिलचस्पी दिखा रही हैं। कारी बनकर वे महिलाओं के लिए होने वाले दीनी जलसों में केरात (पारंपरिक उच्चारण) के साथ उन्हें कुरान सुना और समझा सकेंगी।
मुरादाबाद के कोहिनूर तिराहा स्थित मदरसा जामियातुल कारियात फैजाने पंजतन पाक में कई लड़कियां पूरे हौंसले के साथ केरात का हुनर सीख रहीं हैं। ये कारी होने के बाद दीनी खिदमत को अंजाम देंगी।
मदरसा जामियातुल कारियात फैजाने पंजतन पाक शहर के उन गिने चुने मदरसों में शामिल है, जहां मुस्लिम लड़कियां बुलंद इरादों के साथ कुरान को पारंपरिक तरीके से पढ़ने का सलीका सीख रही हैं। मदरसे के बानी कारी हाशिमुल कादरी और उनकी पत्नी कारिया नासिरा खातून इन लड़कियों को इसके तौर-तरीके सिखा रहे हैं।