अपने सहकर्मी की हत्या के आरोप में सोलह साल से जेल की सजा काट रहे एक जहाज चालक को देश की शीर्ष अदालत ने मंगलवार को बरी कर दिया।
ट्रायल कोर्ट द्वारा मजेंद्रन लांगेश्वरन को दोषी करार दिए जाने और दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उसे उम्रकैद की सजा देने के फैसले को पलटते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया। अपने सहकर्मी एल शिवरामन की 1996 में हत्या करने के आरोप में मजेंद्रन को 2002 में ट्रायल कोर्ट ने दोषी माना था।
जस्टिस पी सदाशिवम और एमवाई इकबाल की पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि सजा को कानून के मुताबिक बरकरार नहीं रखा जा सकता।
कोर्ट ने कहा, ‘तथ्य यह है कि अभियोजन पक्ष को इस मामले में खून से सने दो चाकू मिले। वह यह बताने में विफल रहा है कि मृतक पर दूसरे चाकू से हमला किसने किया था।’
अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को आधार मानते हुए गंभीर चूक की है। जिसने अपने फैसले में अपराध में इस्तेमाल एक चाकू पर ही गौर किया था, जबकि मौके पर मौजूद खून से सने दूसरे चाकू की तरफ ध्यान ही नहीं दिया गया।
शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ की गई मजेंद्रन की अपील मान ली और निर्देश दिया कि अगर कोई मामला न हो तो उसे तत्काल रिहा किया जाय।
उल्लेखनीय है कि इस मामले की जांच करने वाली सीबीआई ने बताया था कि जहाज जब सिंगापुर के रास्ते दक्षिण अफ्रीका से जापान जा रहा था।
तब दोनों चालकों के बीच किसी बात को लेकर जमकर झगड़ा हुआ था। जिसके बाद मजेंद्रन ने चाकू से अपने सहकर्मी की हत्या कर दी थी।