विभागीय पत्रिका में छपी एक महिला ट्रैफिक इंस्पेक्टर की कविता को लेकर मुंबई पुलिस विवादों में घिर गई है। कविता में पिछले साल आजाद मैदान पर हुई रैली में शामिल प्रदर्शनकारियों को सांप और गद्दार बताया गया है। साथ ही इनके हाथ काट लिए जाने का भी सुझाव दिया गया है। इस संदर्भ में मुस्लिम ए हिंद नामक एनजीओ की संचालिका अमीन मुस्तफा इदरिसी और आजाद मैदान हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए मोहम्मद सिद्दीकी ने प्रदेश गृह विभाग, मुंबई पुलिस कमिश्नर आफिस और आजाद मैदान पुलिस थाने से शिकायत दर्ज कराई है। सिद्दीकी वर्तमान में जमानत पर हैं।
दोनों ने अपनी शिकायत में पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह, संयुक्त पुलिस कमिश्नर (प्रशासन) हेमंत नागराले और कविता लिखने वाली महिला इंस्पेक्टर सुजाता पाटिल, प्रकाशक और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पाटिल की कविता पुलिस विभाग की पत्रिका संवाद में प्रकाशित हुई है। हालांकि पाटिल ने लिखित माफी मांग ली है। उन्होंने कहा कि उनका आजाद मैदान नामक शीर्षक कविता के जरिए किसी भी व्यक्ति या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था। पाटिल की कविता को लेकर मुंबई पुलिस को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है।
हेमंत नागराले ने बताया कि सुजाता पहले ही कविता पर माफी मांग चुकी हैं। बिना शर्त माफीनामा संवाद के अगले संस्करण में प्रकाशित किया जाएगा। पाटिल माटुंगा में ट्रैफिक पुलिस इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। पाटिल की कविता की कुछ पंक्तियां ये हैं, ‘हौसला बुलंद था, इज्जत लुट रही थी...हिम्मत की गद्दारों ने अमर ज्योति को हाथ लगाने की, काट देते हाथ उनके तो फरियाद किसी की भी न होती...सांप को दूध पिला कर, बात करे हैं हम भाईचारे की।’ पाटिल ने अपनी कविता में सुझाव दिया है कि पुलिस को गोलियों की होली खेली चाहिए। पिछले साल 11 अगस्त को असम और म्यांमार पर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आजाद मैदान पर रैली का आह्वान किया गया था। रैली के दौरान प्रदर्शनकारी हिंसक हो उठे थे और इसमें दो लोग मारे गए थे जबकि महिला पुलिसकर्मियों समेत कई अन्य लोग घायल भी हुए थे।