1993 के ब्लास्ट्स में 10 वां आरोपी है, जिसने 12 मार्च, 1993 को बम से भरा दो वीआईपी सूटकेस एक वैन में रखकर प्लाजा थिएटर ले गया और कुरैशी भी उसके साथ था।
प्लाजा थियेटर पर हुए बम विस्फोट में 10 लोग मारे गए और 37 घायल हुए थे। मुकादम पर विस्फोटों के लिए इस्तेमाल वाहनों में आरडीएक्स रखने और साजिश रचने को अंजाम देने के लिए धन इकट्ठा करने का आरोप था, लेकिन इसकी सजा-ए-मौत को उम्र कैद में तब्दील कर दी गई थी।
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नसीम बारमरे:-
अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हैंड ग्रेनेड फेंकने का दोषी है जिसे 17 जुलाई, 2007 को टाडा अदालत से उम्रकैद की सजा मिली।
बदल दी गई सजा
मोहम्मद अब्दुल शोएब घंसार:-आरोपी नंबर - 9(जेल में) 43 वर्षीय साल,शोएब ने जवेरी बाजार में आरडीएक्स लदा स्कूटर खड़ा किया। विस्फोट में इस्तेमाल वाहनों में विस्फोटों को भरने का आरोप। इसे विभिन्न धाराओं के तहत साजिश रचने और हत्या का दोषी माना गया।
शहनवाज कुरैसी:-आरोपी नंबर - 29 (दोनों जेल में) प्लाजा सिनेमा ब्लास्ट के आरोपी है। कुरैसी कानून की विभिन्न धाराओं के तहत आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने और हत्या का दोषी है।
अब्दुल गनी इस्माइल तुर्क:- आरोपी नंबर - 11 (जेल में) तुर्क सेंचुरी बाजार विस्फोट के आरोपी (यहां सबसे ज्यादा 88 लोगों की मौत , 159 घायल तथा 1.59 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ।) सेंचुरी बाजार विस्फोट में इस्तेमाल जीप में आरडीएक्स रखने का दोषी है।
ये हैं और चार लोग
परवेज नाजीज अहमद शेख:- आरोपी नंबर - 12 (जेल में), कथा बाजार, सी रॉक होटल बम विस्फोट का आरोपी। शेख मुंबई के विभिन्न हिस्सा में विस्फोटक लगाने का दोषी है।
मोहम्मद इकबाल शेख:- आरोपी नंबर - 23 (जेल में) नयगांव क्रॉस रोड पर बम प्लांट किया (विस्फोट नहीं हुआ।) शेख संधेरी में हथियार चलाने का प्रशिक्षण लेने का दोषी, आरडीएक्स से भरी गाड़ियों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर लगाने में सहायता देने का दोषी है।
फारुख पावले आरोपी नंबर:-16 (1993 से जेल में।) मुंबई स्टोक एक्सचेंज, सेना भवन और एयर इंडिया बिल्डिंग ब्लास्ट का आरोपी। पावले कानून की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार है।
मुस्ताक तरानी:- आरोपी नंबर - 44 (जेल में)। जुहु सेंटूर होटल बम विस्फोटटाइगर मेमन तथा अन्य के साथ होटल ताज महल की बैठक में शामिल होने का आरोप है।
इस बैठक में ही आतंकी विस्फोट की समीक्षा हुई थी। दक्षिणी मुंबई की शेख मेनन स्ट्रीट पर आरडीएक्स से लदे स्कूटर को पार्क का दोषी। इस स्कूटर में विस्फोट नहीं हुआ था। उसे आईपीसी की धारा 120 (बी) के तहत साजिश रचने का दोषी पाया गया था।
जाकिर हुसैन:-आरोपी नंबर - 32, माहिम स्थित मछुआरों की कालोनी में ग्रेनेड फेंकने का दोषी।
फिरोज मलिक:- आरोपी नंबर - 39 धमाकों की साजिश में शामिल होने का दोषी।
अब्दुल अख्तर खान धमाकों की साजिश में शामिल होने का दोषी।
मेमन परिवार 12 सितंबर, 2006 को टाडा अदालत ने विस्फोट मामले में मेमन परिवार के चार सदस्यो याकूब, एस्सा, यूसुफ और रुबीना को दोषी करार दिया था, जबकि तीन अन्य सदस्यो, सुलेमान, राहिन और हनीफा मेमन को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
जज पी डी कोडे ने इस मामले के फैसले का पहला हिस्सा सुनाया। फैसले में प्रमुख आरोपियों में से एक टाइगर मेमन को फरार घोषित किया था।