बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन करने से इनकार कर दिया है। मायावती ने कहा कि मुलायम सिंह यादव सांप्रदायिक शक्तियों से मिले हुए हैं। उनसे हाथ मिलाने का सवाल ही नहीं उठता।
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सपा-बसपा की दोस्ती का प्रस्ताव देने पर उन्होंने लालू प्रसाद यादव पर भी निशान साधा। उन्होंने कहा, '2 जून, 1995 को लखनऊ गेस्टहाउस में मेरे ऊपर जैसा हमला हुआ था, वह अगर लालू यादव की बहन या बेटी पर होता तो क्या वे यही बात कहते।'
उन्होंने कहा उत्तर प्रदेश में सपा के साथ क्या किसी भी पार्टी के साथ बसपा गठबंधन नहीं करेगी। वहीं, सपा नेता रामगोपाल यादव ने भी बसपा के साथ गठबंधन से इनकार किया है।
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मुलायम ने दिए संकेत
समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव ने आज बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती से समझौता करने के संकेत दिए थे।
उन्होंने कहा था कि यदि राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव मध्यस्थता करें तो मायावती के साथ हाथ मिलाया जा सकता है। लालू प्रसाद यादव ने शनिवार को उत्तर प्रदेश में मायावती और मुलायम को हाथ मिलाकर भाजपा के खिलाफ लड़ने की अपील की थी।
हालांकि उस समय दोनों दलों ने लालू की अपील को खारिज कर दिया था।
लालू ने की थी अपील
लोकसभा चुनावों की करारी शिकस्त के बाद बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड ने महागठबंधन बनाया है। शनिवार को हाजीपुर में लगभग 20 साल बाद लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार ने एक मंच पर आकर रैली की थी।
इसी रैली में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने मुलायम सिंह यादव और मायावती को भी समय की जरूरत को देखते हुए एक साथ आने की सलाह दी थी।
उन्होंने कहा था कि बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में भी भाजपा को रोकने के लिए महागठबंधन की जरूरत है।
दोनों दलों ने खारिज की थी अपील
हालांकि सपा और बसपा दोनों ही पार्टियों ने गठबंधन की संभावना को खारिज कर दिया था।
सपा ने कहा था कि बिहार में भले ही लालू और नीतिश भाजपा के सामने को खुद को बचाने के लिए हाथ मिलाना पड़े हो लेकिन उत्तर प्रदेश में सपा अपने दम पर भाजपा को टक्कर देने की कोशिश कर रही है।
बसपा ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि देशभर में सपा सरकार की इतनी बदनामी हो गई है। उसके साथ हाथ मिलाने से फायदा कम घाटा ज्यादा है।
बसपा के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि अगर बसपा सपा के साथ जाती है तो उसका अपना दलित वोट बैंक कभी वापस नहीं आ पाएगा। सांसद ने कहा कि पार्टी को भले एक सीट न मिले। लेकिन देशभर में पार्टी अकेले ही लड़कर खुद को मजबूत करेगी।
मोदी को अकेले टक्कर देने के मूड में थी सपा
सपा महासचिव नरेश अग्रवाल ने गठबंधन के मुद्दे पर कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बसपा के साथ गठबंधन की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा भाजपा को पटखनी देने के लिए काफी है। पार्टी अपने बहुमत के बल पर उत्तर प्रदेश में सत्ता में आई है।
उन्होंने कहा था कि लोकसभा चुनाव में हार जरूर मिली है, लेकिन जल्द ही पार्टी प्रदेश में वापसी करेगी।
2008 में परमाणु करार के मुद्दे यूपीए सरकार से माकपा ने समर्थन वापस ले लिया था। उस समय सपा ने भी माकपा का साथ छोड़कर कांग्रेस से हाथ मिला लिया था। वहीं, दूसरी तरफ बसपा सुप्रीमो मायावती माकपा के साथ गठजोड़ कर तीसरे मोर्चे में शामिल हो गई थी।
90 के दशक में था गठबंधन
समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने 90 के दशक के आरंभ में मंदिर आंदोलन की लहर को रोकने के लिए आपस में हाथ मिलाया था। उत्तर प्रदेश में भाजपा को रोकने में ये गठबंधन कामयाब भी रहा था।
1992 में बाबरी मस्जिद ढहने के बाद 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन ने बहुमत हासिल किया था।
हालांकि 1995 के कुख्यात लखनऊ गेस्टहाउस कांड के कारण दोनों दलों का गठबंधन टूट गया। उसके बाद से ये दोनों दल अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के लिए ही अधिक चर्चा में रहे।
भाजपा ने किया तंज
माया और मुलायम की दोस्ती की खबर आते ही भाजपा ने दोनों दलों पर तीखा हमला किया है। भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने सपा और बसपा पर तंज करते हुए कहा कि चोर-चोर मौसेरे भाई!
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा के विधायकों के व्यवहार से समझा जा सकता है कि वे सपा की बी टीम बन चुके हैं।