समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने मंगलवार को लोकसभा में मुस्लिमों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिए जाने की पुरजोर मांग की। सपा प्रमुख ने यह सियासी दांव बसपा के दलितों को प्रमोशन में आरक्षण संबंधी कानून की काट में चला है।
मुलायम ने मुसलमानों की सामाजिक स्थिति को दलितों से भी बदतर करार देते हुए यूपीए सरकार पर मुस्लिम आरक्षण के मामले में हीलाहवाली करने का आरोप लगाया। साथ ही सच्चर कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप मुसलमानों को आबादी के हिसाब से आरक्षण देने की मांग की।
बहरहाल, सरकार ने सपा सुप्रीमो की मुस्लिम आरक्षण पर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने गोलमोल जवाब देते हुए केवल इतना कहा कि सच्चर समिति की उन सिफारिशों पर सरकार विचार कर रही है जिन पर अभी तक अमल नहीं किया जा सका है।
लोकसभा में मुलायम सिंह यादव ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि देश में मुसलमानों की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति अनुसूचित जाति एवं जनजाति से भी खराब है। उन्होंने कहा कि देश के विकास में किसी का योगदान है तो वह मुसलमान और किसान हैं, लेकिन अफसोस की बात है कि उनकी हालत बहुत ही खराब है।
उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि मुस्लिमों की स्थिति के बारे में गठित सच्चर समिति और रंगनाथ मिश्र समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए क्या कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों की हालत तभी सुधरेगी जब उन्हें आबादी के हिसाब से आरक्षण दिया जाएगा।
मुलायम सिंह ने कहा कि सरकार ने सदन में ही इस मुद्दे पर आश्वासन दिया था। प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि हम सच्चर कमेटी की सिफारिशों पर विचार करेंगे। माकपा के बासुदेव आचार्य ने सपा प्रमुख की बातों का समर्थन किया।
संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि सच्चर समिति की कई सिफारिशों पर सरकार ने कार्रवाई की है, जो मुद्दे बाकी हैं उन पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। मंत्री के बयान के दौरान मुलायम सिंह व सपा के कई अन्य सांसद खड़े होकर टोका टाकी करते रहे।
उन्होंने पूछा कि मुसलमानों के आरक्षण दिए जाने पर सरकार की क्या राय है। इस बीच, भाजपा के कुछ सांसद भी हस्तक्षेप करते देखे गये। भाजपा सांसद धर्म आधारित आरक्षण को संविधान के खिलाफ बता रहे थे।