2014 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ताना-बाना बुनने में जुटे हैं। वह एक ओर जहां प्रदेश सरकार की साख और देश भर के समाजवादियों व धर्मनिरपेक्ष संगठनों और व्यक्तियों को लामबंद करने की नीति पर काम कर रहे हैं तो यूपी के सफलता को ध्यान में रखते हुए देश भर में जातीय गोलबंदी के लिए भी उन्होंने पूरा जोर लगा दिया है।
यहां अपने छोटे भाई और प्रदेश सरकार में काबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव के सरकारी आवास पर यादव महासभा के पदाधिकारियों के रात्रिभोज में उन्होंने इस सिलसिले में न सिर्फ लोगों से बातचीत की बल्कि विभिन्न प्रदेशों में जातीय गोलबंदी से पार्टी को होने वाले नफा-नुकसान का भी हिसाब-किताब समझा।
यादव महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखराम सिंह यादव की मानें तो यह भोज सामान्य शिष्टाचार का हिस्सा है। इसका कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है। पर, सूत्रों की मानें तो यह भोज पूरी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। मुलायम ने यादव महासभा के सभी प्रदेश अध्यक्षों से उनके यहां की उन लोकसभा सीटों के बारे में विस्तार से जानकारी ली, जहां पार्टी के लिए कुछ संभावनाएं बन सकती है। उन्होंने यह भी समझने की कोशिश की कि किस प्रदेश में किस सीट पर सपा को किस दल या व्यक्ति के साथ का लाभ मिल सकता है। उससे भी यह बात साफ हो जाती है कि इस भोज का मकसद सपा को दूसरे राज्यों में विस्तार देना ही था।
प्रदेश में सपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद से ही मुलायम सिंह यादव दिल्ली में पार्टी की निर्णायक भूमिका को लेकर कवायद में जुटे हैं। वह कई बार खुद इसका खुलासा भी कर चुके हैं। वह यह भी कह चुके हैं कि सपा को बड़ी भूमिका के लिए न सिर्फ उत्तर प्रदेश में मजबूती से पैर जमाए रखने होंगे, बल्कि दूसरे राज्यों में भी पार्टी की पकड़ व पहुंच बढ़ाने की चिंता करनी होगी।
दरअसल, मुलायम के मन में सपा को राष्ट्रीय दल का दरजा न मिल पाने का कसक है। वह जानते हैं कि प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने का लाभ लेकर अगर वह दूसरे राज्यों में पार्टी के पैर न जमा पाए तो सपा को राष्ट्रीय दल बनाने और खुद केंद्रीय राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने का उनका सपना पूरा हो पाना मुश्किल हो जाएगा। मुलायम जैसे अनुभवी नेता को पता है कि यह काम तभी हो सकता है जब उनके भरोसे के लोग गोलबंद हों। साथ ही उन्हें भी अपनी जाति के जनाधार का भी मनोवैज्ञानिक लाभ मिल सके।