व्यापमं घोटाले में भ्रष्टाचार, साजिश और धोखाधड़ी जैसे आरोपों का सामना कर रहे मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव ने अपने बचाव में परोक्ष तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर लगे आरोपों को ढाल बना लिया है।
उन्होंने उस एक्सेल शीट की गंभीरता से जांच की मांग उठाई है, जो पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने एसआईटी को सौंपी थी।
दिग्विजय सिंह का आरोप है कि संविदा शिक्षक भर्ती परीक्षा की मूल एक्सेल शीट के साथ छेड़छाड़ की गई है और 48 स्थानों पर सीएम (चीफ मिनिस्टर) शब्द को डिलीट कर उसकी जगह राज्यपाल, उमा भारती और मिनिस्टर लिख दिया गया है।
जानकारी के अनुसार राज्यपाल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कराने के लिए जबलपुर हाईकोर्ट में बृहस्पतिवार को याचिका दायर कर दलील दी है कि एक आरोपी के बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज करना संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन है।
एफआईआर दर्ज करने से पहले घोटाले से जुड़े आरोपी के बयानों की जांच होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नही हुआ। इस पर 9 मार्च को सुनवाई होगी।
राज्यपाल ने दिग्विजय सिंह के आरोपों को ही आधार बनाया है। हालांकि उनका कहना है कि मूल एक्सेल शीट के साथ छेड़छाड़ का आरोप शिक्षक भर्ती घोटाले से संबंधित है, लेकिन इसकी गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।