तपती और झुलसती गर्मी के प्रकोप को झेल रहे उत्तर भारत के लोगों को फिलहाल कुछ दिन और राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है।
दक्षिण-पश्चिम मानसून की उम्मीद में बैठे लोगों को कुछ दिन और इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि अनुमान है कि केरल में मानसून को पहुंचने में अभी और एक हफ्ता लग सकता है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान विभाग के प्रमुख डी शिवानंद पाई ने इस संबंध में कहा, ‘अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है।
परिस्थितियां आगामी तीन दिनों में बंगाल की खाड़ी के ऊपर कुछ हिस्सों में मानसून के और आगे बढ़ने के अनुकूल बन रही हैं।’
हालांकि वैज्ञानिकों की नजर में यह मानसून के जल्द आने के संकेत नहीं हैं। राष्ट्रीय मध्यम रेंज मौसम पूर्वानुमान केंद्र की निदेशक स्वाति बसु ने कहा, ‘हम अब भी अपने पूर्वानुमान पर डटे हुए हैं।
केरल में तीन जून तक ही मानसून के आने की संभावना है।’ अंडमान सागर में सामान्य तिथि से तीन दिन पहले 17 मई को पहली बारिश हुई थी, जो भारतीय कृषि के लिए काफी अहम मानी जा रही है।
17 और 20 मई के बीच मानसून आगे बढ़ा था, लेकिन इसके बाद यह थम गया है। तटीय बंगलादेश और म्यांमार के कुछ हिस्सों में आए महासेन चक्रवात ने मानसून हवाओं से नमी सोख ली है।
पाई ने केरल में मानसून आने में देरी का कारण बताते हुए कहा, ‘चक्रवात की गतिविधि मानसून की स्पीड को कमज़ोर कर देती है। इसे पहचान करने में थोड़ा समय लगता है।’
पिछले हफ्ते से उत्तर भारत में पारा 45 के पार जा चुका है। जानकारों को उम्मीद है कि जून के पहले हफ्ते में केरल में मानसून आने के बाद अच्छी बारिश हो सकती है।