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आलोचनाओं से घिरे भागवत विवादित बोलने से बचे

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ईसाई धर्म व मदर टैरेसा को लेकर अपने विवादित बोल को लेकर चारों ओर से आलोचना झेल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत मंगलवार को जयपुर में कुछ भी विवादित बोलने से बचे।
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उन्होंने सोमवार को भरतपुर में ईसाई धर्म व मदर टैरेसा को लेकर विवादित बोल बोले थे। इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा है कि चर्च पर हमलों तथा धर्म व जाति को लेकर की जा रहीं बयानबाजियों की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार को लेनी चाहिए।

भागवत मंगलवार को हरिशचन्द्र माथुर लोक प्रशासन संस्थान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित संत समागम को संबोधित कर रहे थे।

मीडिया को कार्यक्रम से दूर रखा गया था। जनकारी के अनुसार उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि हमारा देश संतों की वाणी को परंपरा से ही सत्य मानने वाला देश रहा है।
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धर्म एवं जाति की बयानबाजी

हिन्दू समाज को आगे बढऩे के लिए अपने संस्कारों और मूल्यों को पुनर्जीवित करना होगा। हिंदू समाज की दुर्बलता एवं निद्रा के कारण देश में ऐसे लोग आगे बढ़ रहे है, जिन्हें देश समाज व संस्कृति की जानकारी नहीं है। संत अपनी तपस्या की शक्ति से हिंदू समाज को एकत्रित कर उसे जागृत कर सकते है।

इधर, पायलट ने मीडिया से कहा कि आठ-नौ माह में चर्चो पर हमले तथा धर्म एवं जाति पर बयानबाजी की जा रही है, जिसकी केन्द्र सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इस प्रकार के बयानों का प्रदेश एवं देश स्तर के नेताओं द्वारा खंडन किया जाना चाहिए। पायलट ने भागवत द्वारा सेवाभावी मदर टेरेसा के खिलाफ की गई टिप्पणी को अशोभनीय बताया तथा कहा कि टेरेसा की सेवा विश्व प्रसिद्ध है और इसी सेवाभाव के लिए उन्हें नोबल पुरस्कार से नवाजा गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी एवं उनसे जुड़े संगठनों के नेताओं द्वारा धर्म एवं जाति पर बयानबाजी सोची समझी साजिश के तहत किया जा रहा है। ऐसी बयानबाजी एवं नकारात्मक सोच देश की एकता के लिए खतरा उत्पन्न करती है।
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