अगले साल होने वाले आम चुनावों पर निगाह लगाए बैठे नरेंद्र मोदी ने सद्भावना की राह पर एक और कदम बढ़ा दिया है।
गुजरात सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह 2002 में क्षतिग्रस्त हुईं मस्जिदों की मरम्मत के लिए जल्द ही एक योजना लागू करेगी।
सरकार ने दस साल चली कानूनी लड़ाई के बाद यू-टर्न लिया है। वह इस दौरान उन मस्जिदों की मरम्मत और रखरखाव का जिम्मा संभालने से मना करती रही है। 2002 में भड़के दंगों में राज्य में कई मस्जिदों को नुकसान पहुंचा था।
गुजरात के एडिशनल एडवोकेट जनरल तुषार मेहता के आश्वासन देने के बाद न्यायमूर्ति के एस राधाकृष्णन और ए के सीकरी की पीठ ने धार्मिक ट्रस्ट की ओर से हुए दावों की जांच-पड़ताल, सर्वे और आकलन संबंधी प्रक्रियाओं पर स्थगनादेश दे दिया है।
राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह 1 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई तक योजना का खाका खींच लेगी और अदालत के अलावा याचिकाकर्ता इस्लामिक रिलीफ कमेटी-गुजरात को दिखा देगी।
कमेटी के चेयरमैन शकील अहमद ने कहा, 'हम यह देखने के लिए इंतजार करेंगे कि सरकार क्या योजना सामने रखती है, लेकिन यह निश्चित तौर पर मोदी प्रशासन के दामन पर लगे धब्बे मिटाने की कोशिश है।'