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आतंकियों के निशाने पर मोदी, मिलेंगे 108 कमांडो

Tue, 17 Sep 2013 09:30 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाए जाने के एक रोज बाद उनकी सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले नेशनल सिक्योरिटी गार्ड ने कमर कस ली है।
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एनएसजी अपने 'सबसे सुरक्षित' वीआईपी की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नई योजनाओं पर काम कर रहा है। जून में जब मोदी को भाजपा की चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाया गया था, तो भी उनकी सुरक्षा बढ़ाई गई थी।

गृह मंत्रालय की मंजूरी से एनएसजी ने मोदी की सुरक्षा के आंतरिक दायरे में सुरक्षाकर्मियों की तादाद 18 से बढ़ाकर 36 कर दी गई थी। बाहरी सुरक्षा दायरा गुजरात पुलिस के हवाले है।
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इसका यह मतलब हुआ कि फिलहाल मोदी के क्लोज रेंज सुरक्षा के लिए 108 एनएसजी सुरक्षाकर्मी रहेंगे। इनमें वे भी शामिल हैं, जो गुजरात से बाहर जाने पर उन वाहनों की सुरक्षा जांचते हैं, जिनमें मोदी सफर करते हैं।

मोदी भारत में सभी बड़े इस्लामी आतंकी संगठनों की हिटलिस्ट में है और उनका लगातार बढ़ता प्रोफाइल सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि गुजरात से बाहर उनका आना-जाना काफी बढ़ गया है।

वास्तव में यह चिंता तब से और बढ़ गई, जब से मोदी ने भाजपा की प्रचार समिति की कमान संभाली है।

एनएसजी ने हाल में गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक में इन वीआईपी की ओर से हुए उल्लंघन का जिक्र किया था।

जून में सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद मोदी अब उन लोगों में शुमार हो गए हैं, जिन्हें एनएसजी की ओर से सबसे ज्यादा सुरक्षा मिलती है।

भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, बसपा प्रमुख मायावती, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, सभी को जेड-प्लस सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन मोदी के पास इन सभी से ज्यादा सुरक्षाकर्मी हैं।

एनएसजी सूत्रों का कहना है कि भले किसी व्यक्ति को जेड-प्लस सुरक्षा मिली हो, लेकिन वीआईपी के साथ रहने वाले सुरक्षाकर्मियों की तादाद इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कितना खतरा है।
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