बिहार में अत्प्रत्यशित और करारी हार के बाद प्रधानमंत्री मोदी अपनी कैबिनेट में बदलाव करना चाहते हैं लेकिन उनकी दिक्कत ये है कि उन्हें ऐसे योग्य उम्मीदवार ही नहीं मिल रहे हैं जो उनकी उम्मीदों के अनुरूप कार्य कर सकें और मोदी के विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने में उनकी मदद कर सकें।
मोदी अपनी इस मुहिम को नए साल पर ही अंजाम देना चाहते थे लेकिन योग्य उम्मीदवारों के अभाव में उन्हें अपनी यह योजना टालनी पड़ रही है। समाचार एजेंसी रायटर की खबर के अनुसार नई दिल्ली में कैबिनेट में बदलाव को लेकर अटकलें लगातार चल रही हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और मोदी के करीबी मंत्री के अनुसार मोदी सरकार में जरूरी बदलाव करना चाहते हैं लेकिन टैलेंट पूल की कमी के कारण वो अपनी योजना को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं।
सरकार के दो साल पूरे होने के करीब ही मोदी पर सरकार की छवि बदलने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। क्योंकि वह बेरोजगारी दूर करने और विकास की बयार बहाने का वादा कर सत्ता में आए थे। लेकिन अर्थव्यवस्था के लगातार गड़बड़ाने और कई राज्यों में लगातार दो सूखों के कारण हालात विकट होते जा रहे हैं।
पार्टी में नहीं मिल रहे योग्य उम्मीदवार
सूत्र के अनुसार मोदी के सामने बड़ी समस्या ऐसे चेहरों को तलाशने की है जो उनके विकास के एजेंडी को तेजी से लागू करके बेहतर परिणाम दे सकें।
मोदी कैबिनेट में कुछ चेहरों के पोर्टफोलियो में भी बदलाव करना चाहते हैं। जैसे सौम्य स्वभाव वाले अरुण जेटली को दोबारा रक्षा मंत्रालय का प्रभार दिया जा सकता है, लेकिन दिक्कत ये है उनकी जगह ऐसा कोई चेहरा मोदी को अपनी कैबिनेट में नहीं दिखता जो उनकी विकास के वादे और उद्योगों में उभार के उनके वादे को पूरा कर सके।
हालांकि सरकार के प्रवक्ता ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। वहीं जेटली के ऑफिस के एक अधिकारी ने इस संबंध में कुछ भी जानकारी होने से मना कर दिया। हालांकि मोदी इस तरह के मुद्दों पर कभी किसी के सामने जिक्र नहीं करते।
ऐसे मुद्दों पर वह अंत समय में ही कोई निर्णय लेते हैं जो पूरी तरह उनका होता है। हालांकि मोदी के एक और नजदीकी ने इस तरह की बातों को अफवाह करार देते हुए कहा कि इन बातों का कोई आधार नहीं है।
गिरीराज सिंह और निरंजन ज्योति पर गिर सकती है गाज
सरकार के साथ समस्या ये भी है कि उसके पास योग्य उम्मीदवारों की कमी है, और वह उदारवादी या लेफ्ट विचारधारा के लोगों से दूरी बनाए रखना चाहती है। क्योंकि कांग्रेस पार्टी के दस साल के शासन में दक्षिणपंथी विचारधारा को पनपने का अवसर बिल्कुल नहीं मिल सका।
भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे मानते हैं कि कांग्रेस के मुकाबले उनके पास टैलेंट पूल की कमी है, लेकिन यह कुछ समय की बात है जल्द ही हम अपना आधार बढ़ा लेंगे।
वहीं बिहार में भाजपा की हार के बाद पार्टी के मातृत्व संगठन और सरकार के अंदर से भी ऐसे लोगों को बाहर करने की आवाजें उठने लगी हैं जो बेहतर नतीजे नहीं दे सके। उत्तर प्रदेश में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पूर्व पार्टी पूरी तरह अपने विकास के एजेंडे को लागू कर सरकार की छवि बेहतर करना चाहती है।
खासकर मोदी की निगाह ऐसे नेताओं को हटाने पर है जो अल्पसंख्यकों के प्रति सख्त बयान देते रहे हों। अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार टिप्पणी करने वाले जूनियर मंत्री गिरीराज सिंह और निरंजन ज्योति को भी हटाया जा सकता है। हालांकि सिंह और ज्योति दोनों के कार्यालयों ने इस तरह के किसी बदलाव की जानकारी होने से इंकार किया है।