प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए मंगलवार को जब म्यांमार पहुंचे तो उन्हें एक जमीनी सच्चाई का अहसास हुआ, यह कि भारत अपने घर के पिछवाड़े चल रही एक दौड़ में कितना पीछे छूट गया है।
मोदी का विशेष विमान नेय पी ताव इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा और वहां से उनकी कारों का काफिला सीधे राष्ट्रपति थिन सेन के महल में पहुंचा। नेय पी ताव एक स्मार्ट सिटी है जिसके जैसे 100 शहरों की कल्पना इस समय मोदी सरकार भारत में कर रही है।
यहां की सड़कें किसी फार्मूला रेस के ट्रैक से कम नजर नहीं आतीं। दोनों ओर आलीशान होटल मेहमानों के स्वागत में बेताब खड़े हैं और ढांचागत सुविधाएं धनी देशों की विश्व स्तरीय राजधानियों का मुकाबला करती हैं। और इस सब में कहीं न कहीं चीन के फुट प्रिंट हैं।
म्यांमार में चीन की मौजूदगी की झलक एयरपोर्ट पर उतरते ही दिखने लगती है। म्यांमार दरअसल भारत और चीन के बीच चली सामरिक दौड़ की कहानी कहता है जिसमें कछुआ अपनी पीढ़ियों की विरासत के मद में बीच रास्ते में सोता रह गया और खरगोश ने अतीत से सबक लेते हुए दौड़ना जारी रखा।
म्यांमार के राष्ट्रपति थिन सेन और प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत 45 मिनट चली और दोनों ने एक स्वर से इस बात पर सहमति जताई कि दोनों देशों का दो अरब डॉलर का सालाना व्यापार क्षमता के हिसाब से बेहद कम है। दोनों ने यह भी माना कि पड़ोसी देश होने के बावजूद दोनों देशों की सड़क कनेक्टिविटी खराब है।