भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी इन दिनों कुछ चिंतित हैं। लोकसभा चुनावों से पहले उनका रथ सही रफ्तार से आगे बढ़ रहा था, लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने हल्का सा ब्रेक लगाकर उन्हें डरा दिया है। भाजपा दबी आवाज में मानने लगी कि केजरीवाल कांग्रेस से कहीं ज्यादा नुकसान उसका कर सकते हैं।
ऐसे में मिशन 272 के साथ आगे बढ़ रही भाजपा प्लान बी पर भी तैयारी कर रही है। यानी अगर वह 272 सीटों तक पहुंचने में कामयाब नहीं रहती, तो उसे साथियों की जरूरत होगी और फिलहाल एनडीए का कुनबा सिमटा हुआ है।
ऐसे में भाजपा की निगाह मोदी के नाम पर राजी दक्षिण भारत के उन राजनीतिक दलों पर टिकी है, जो आगामी कुछ दिनों में उसके पाले में आ सकते हैं। आइन देखें मोदी को कौन से साथी मिल रहे हैं:
गठजोड़ में मोदी का पहला इम्तहान!
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी को आगे बढ़ाकर नए सहयोगी बटोरने से जुडी भाजपा की क्षमता को कामयाबी मिल सकती है, क्योंकि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के कुछ राजनीतिक दल भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए में मिलने जा रहे हैं।
जुलाई में नीतीश कुमार की जनता दल युनाइटेड के साथ रिश्तेदारी टूटने के बाद एनडीए का पहला विस्तार जनवरी में होगा, जब दो दक्षिणी राज्यों में पोंगल और संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा।
तमिलनाडु में वाइको की अगुवाई वाली एमडीएमके, एस रामदास की पीएमके और आंध्र प्रदेश की तेलुगू देशम पार्टी एनडीए के कुनबे में शामिल हो सकते हैं।
इन पर टिकी हैं भाजपा की उम्मीदें?
भाजपा को उम्मीद है कि वह जल्द ही तमिल अभिनेता और नेता विजयकांत की डीएमडीके को भी मनाने में सफलता मिल जाएगी। फिलहाल कांग्रेस और एम करुणानिधि की डीएमके भी इसी चक्कर में लगी है।
तटीय इलाकों में अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश में जुटी भाजपा ने आंध्र में जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के बजाय चंद्रबाबू नायडू के साथ जाने का फैसला किया है। नायडू 2004 तक एनडीए में ही शामिल रहे हैं।
टीडीपी के साथ जाने के लिए जोर लगा रहे वरिष्ठ भाजपा नेता वेंकैया नायडू उम्मीद बांध रहे हैं कि सीमांध्र क्षेत्र से कुछ केंद्रीय मंत्री भाजपा के बैनर तले लड़ सकते हैं।
जल्द मिलेंगे नए साथी
तमिलनाडु में पीएमके और डीएमडीके इस हफ्ते में नरेंद्र मोदी को समर्थन देने के फैसले पर औपचारिक मुहर लगा देंगी। कुछ दिन पहले ही वाइको और रामदास ने भाजपा आला कमान के नेताओं से बातचीत पूरी की है।
वाइको ने पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने भाजपा नेताओं के साथ बातचीत की है और डीएमडीके का मुख्य उद्देश्य केंद्र की कांग्रेसनीत सरकार को हटाना और कांग्रेस के मदद से बनने वाली किसी भी सरकार का रास्ता रोकना है।
वाइको का कहना है कि भाजपा के लिए देश भर में समर्थन बढ़ रहा है और कई राज्यों में मोदी लहर का असर देखा जा सकता है। वास्तव में वाइको और रामदास, दोनों ने मोदी को पीएम पद का दावेदार बनाने का ऐलान का समर्थन किया था।
छोटे दलों का बड़ा समूह बनेगा एनडीए?
छोटे राजनीतिक दलों की अगुवाई करने से जुड़ा भाजपा का फैसला तब हुआ, जब मोदी ने सितंबर में त्रिचि में रैली को संबोधित किया था। उसके नेताओं ने डीएमके साथ जुड़ने के फैसले के खिलाफ मत रखा, क्योंकि उसकी छवि पर भ्रष्टाचार के दाग पड़े हैं।
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता की अगुवाई वाली एनआईएडीएमके पहले ही साफ कर चुकी है कि वह किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल से हाथ मिलाने को तैयार नहीं है।
जयललिता और मोदी के बीच अच्छे रिश्ते बताए जाते थे, लेकिन जयललिता की पार्टी ने साफ कर दिया कि वह उन्हें प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहती है, ऐसे में पीएम बनने के ख्वाब सजा रहे मोदी के लिए यह बुरी खबर थी।
इन सीटों पर टिकी मोदी की नजर
भगवा राजनीतिक दल की निगाह कन्याकुमारी, कोयम्बटूर, त्रिचि, तिरुपुर और नीलगिरि लोकसभा सीटों पर है, जो उसने 1998 और 1999 में जीती थीं।
इसके लिए भाजपा के काडर गांव-गांव घूमकर अभियान चलाए हुए हैं। इसके तहत मोदी की उपलब्धियां और यूपीए सरकार के तहत हुए भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया जा रहा है।
जाहिर है, उत्तर और मध्य भारत में सिमटी भाजपा कर्नाटक हाथ से निकलने के बाद दक्षित भारत में अच्छा प्रदर्शन करना चाहती है, ताकि लोकसभा में जादुई आंकडे़ तक पहुंच सके। भले इसके लिए साथियों की ही जरूरत क्यों न पड़े!