महाराष्ट्र में पहली भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री पद पर अपने पसंदीदा देवेंद्र फडनवीस को बिठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मंजूरी लेने के लिए खुद पहल करनी पड़ी।
मोदी के आग्रह को स्वीकार कर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नितिन गडकरी को मुख्यमंत्री बनाने की मुहिम को रोक दिया और फडनवीस का रास्ता साफ कर दिया। अब पार्टी पर्यवेक्षक राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा मुंबई जाकर विधायक दल की बैठक में फडनवीस के नाम पर मुहर लगाएंगे।
संघ के एक प्रमुख नेता ने बताया कि संगठन चाहता था कि महाराष्ट्र में भाजपा सरकार की कमान गडकरी संभालें। संघ के शीर्ष नेतृत्व को लगता था कि राज्य की उलझी हुई सियासी स्थिति को गडकरी जैसा मंजा राजनेता ही संभाल सकता है, जबकि अन्य दावेदारों देवेंद्र फडनवीस, सुधीर मुनगंटीवार, विनोद तावड़े और एकनाथ फड़से का सियासी अनुभव कम है।
संघ ने मोदी की बात मानी
संघ के एक शीर्ष नेता जिन्हें भागवत ने प्रधानमंत्री से संवाद करने के लिए अधिकृत किया है, ने संघ नेतृत्व की इच्छा से प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष को अवगत कराया था। लेकिन शुरू से ही मोदी और अमित शाह की पसंद नागपुर से विधायक और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष देवेंद्र फडनवीस रहे हैं।
इसीलिए मोदी ने खुद भागवत से फोन पर बात की और उनसे कहा कि गडकरी जैसे अनुभवी नेता की जरूरत केंद्र में ज्यादा है और महाराष्ट्र में पार्टी का नया नेतृत्व विकसित करने के लिए किसी युवा को कमान सौंपना पार्टी के हित में रहेगा। गडकरी की ही तरह फडनवीस भी संघ नेतृत्व के दुलारे हैं। इसलिए मोदी की बात को संघ प्रमुख ने मंजूर कर लिया।
इसके बाद फडनवीस के नाम को नागपुर से हरी झंडी मिल गई। गडकरी के करीबी महाराष्ट्र भाजपा के एक नेता के मुताबिक नागपुर में 39 विधायकों की बैठक में गडकरी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग जैसा कदम संघ की दिलचस्पी के बाद ही उठाया गया। वरना मोदी लहर में ऐसा कदम उठाने का साहस कौन कर सकता था।
भागवत से मिले फडनवीस
महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष देवेंद्र फडनवीस ने सीएम बनने की राह में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बाद अब संघ का भी आशीर्वाद हासिल कर लिया है। फडनवीस ने शुक्रवार देर रात संघ मुख्यालय जाकर संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। फडनवीस का प्रदेश का नया मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है। हालांकि संघ प्रमुख ने आशीर्वाद के साथ उन्हें सीख भी दी है कि महाराष्ट्र के बारे में कोई निर्णय लेने से पहले नितिन गडकरी को अवश्य विश्वास में लें।
सूत्रों के अनुसार, संघ का संकेत साफ है कि फडनवीस भले ही राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन केंद्रीय राजनीति में होने के बावजूद महाराष्ट्र में गडकरी का प्रभाव बना रहेगा। संघ सूत्रों का कहना है कि गडकरी के पास तीन अहम मंत्रालय हैं जिसका सालाना बजट करीब 2 लाख करोड़ रुपये है और बड़ी तेजी से काम आगे बढ़ रहा है। ऐसे में गडकरी को मुख्यमंत्री बनाने पर केंद्र में तीन नए मंत्री बनाने पड़ेंगे और कार्य भी प्रभावित होगा।
फडनवीस को गडकरी ने ही राजनीति में आगे बढ़ाया है लेकिन उनके पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटते ही वह गोपीनाथ मुंडे के खेमे में चले गए थे। इससे गडकरी को आशंका थी कि फडनवीस के मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें नजरअंदाज किया जा सकता है। इसलिए उन्होंने संघ से अपनी आशंका जाहिर की और संघ ने भी फडनवीस को बता दिया है कि महाराष्ट्र के बारे में कोई निर्णय लेने से पहले गडकरी का भी समर्थन लें।