मोदी सरकार शीतकालीन सत्र में आर्थिक एजेंडे को पूरा करने के लिए राज्यसभा में जरूरी आंकड़ा जुटाने की मुहिम में जुट गई है।
इस क्रम में जहां शीर्ष स्तर पर पहुंची सियासी तनातनी के बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद केडी सिंह की संसदीय राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूडी के साथ सोमवार को लंबी बैठक हुई। उधर, बसपा ने जदयू पर तीखा हमला बोल यूपीए सरकार की तरह ही मोदी सरकार के लिए भी संकट मोचक बनने के संकेत दे दिए हैं।
दरअसल लोकसभा में जहां भाजपा को अपने दम पर बहुमत हासिल है, वहीं राज्यसभा में पार्टी बहुमत से बहुत दूर है। राज्यसभा की रणनीति के संबंध में एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि सरकार पहले हफ्ते में तनातनी को लेकर आश्वस्त है, मगर इसके बाद स्थिति बदलेगी।
मंत्री के मुताबिक सरकार विधेयक पारित कराने के लिए गैरकांग्रेसी दलों से सीधा संपर्क साधेगी। इस क्रम में उन्होंने सपा से भी संपर्क साधने जाने की संभावना से इनकार नहीं किया। मायावती के संकेत देने के बाद भाजपा सूत्रों का मानना है कि सारदा चिट फंड घोटाले में बुरी तरह उलझी तृणमूल भी बिल के समर्थन में आ जाएगी।
राज्यसभा में इस समय राजग के पास एनसीपी और एआईएडीएमके सहित महज 73 सदस्य ही हैं। बिल पारित कराने के लिए सरकार को 123 सदस्यों का समर्थन चाहिए।
सरकार जरूरी 50 सदस्यों का समर्थन जुटाने के लिए तृणमूल कांग्रेस (12), बीजेडी (7), बीएसपी (14), निर्दलीय (9), आईएनएलडी (1), मनोनीत (10), नगालैंड पीपुल्स फ्रंट (1), एसडीएफ (1) और टीआरएस(1) से अलग अलग संपर्क साधेगी। इस बीच हरियाणा से भी पार्टी के दो सदस्यों के चुन कर आने से भी राजग के खेमे के सदस्यों की संख्या 75 हो जाएगी।