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रामदेव के आश्रम में छिपाकर रखी गई हैं मोदी की पत्नी!

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भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वाराणसी लोकसभा सीट से नामांकन दाखिल किया। पखवाड़े भर पहले उन्होंने गुजरात की वडोदरा सीट से नामांकन भरा था।
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नामांकन पत्र के साथ दाखिल हलफनामें में उन्होंने जसोदाबेन को अपनी पत्नी बताया था। नरेंद्र मोदी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वह चार बार गुजरात की मणिनगर सीट से विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन पिछले नामांकनों में उन्होंने अपनी पत्नी के बारे में जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। नामांकन पत्र में मेरिटल स्टेटस के कॉलम को उन्होंने खाली छोड़ दिया।

लोकसभा चुनावों के पूर्व सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, जिसमें नामांकन पत्र में सभी कॉलमों का भरना अनिवार्य कर दिया गया था, नरेंद्र मोदी ने जसोदाबेन को पत्नी को दर्जा दिया। हालांकि, जसोदाबेन पखवाड़े भर बाद भी सामने नहीं आई हैं। वह कहां हैं, ये पता नहीं है?
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जसोदाबेन चार धामों की यात्रा पर नहीं

नरेंद्र मोदी के वडोदरा में नामांकन के दो दिनों बाद जसोदाबेन के सबसे छोटे भाई कमलेश मोदी ने बताया था कि वे चार धाम की यात्रा पर गई हैं।

उन्होंने बताया था कि जसोदाबेन मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए विशेष व्रत रख रही हैं और नंगे पांव रहती हैं। उनकी तीर्थयात्रा चुनाव परिणामों के बाद ही खत्म होगी। हालांकि अब एक अंग्रेजी पत्रिका ने दावा किया है कि जसोदाबेन चार धामों की यात्रा पर नहीं हैं, ब‌ल्‍कि उत्तराखंड में एक आश्रम में रह रही हैं। यह आश्रम योगगुरु बाबा रामदेव का है।

पत्रिका का दावा है कि तीर्थयात्रा पर जाने का निर्णय जशोदाबेन ने खुद नहीं लिया। मोदी के खुलासे के बाद जसोदाबेन को मीडिया की नजरों से दूर रखने के आननफानन में उन्हें तीर्थयात्रा पर भेजने की योजना बनाई गई थी।

ऋषिदेव में कड़ी सुरक्षा में रखी गईं जसोदाबेन

चुनावों तक शेष समय जसोदाबेन उसी आश्रम में बिताएंगी। पत्रिका के मुताबिक, मोदी ने जिस दिन जसोदाबेन का पत्नी के रूप में स्वीकृति दी, उसी दिन कुछ कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता और सुरक्षाकर्मी तीर्थयात्री के भेष में जसोदाबेन से मिलने आए।

वे एसयूवी में सवार थे। उन्होंने जसोदाबेन से कहा कि आपका चारधाम की यात्रा पूरी करने का समय आ गया है और वे उन्हें अपने साथ लेकर अहमदाबाद चले गए।

वहां से चार्टड विमान से जोसदाबेन को उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा पर बसे औरंगाबाद ले जाया गया और वहां से वे ऋषिदेव स्थित बाबा रामदेव के आश्रम ले भेज दी गई।
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स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य ने दी है ये जानकारी

पत्रिका ये दावा स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य से मिलीं जानकारी के आधार पर किया है। स्वरूपानंद सरस्वती द्वाराकापीठ के शंकराचार्य हैं। शिष्य का कहना है कि जसोदाबेन को रामदेव के आश्रम में कड़ी सुरक्षा में रखा गया है।

गुजरात सिक्योरिटी सर्विसेज के लोग उनकी सुरक्षा में लगे हैं। ये सुरक्षाकर्मी ‌तीर्थयात्रियों के ही भेष में रहते हैं।

पत्रिका के मुताबिक, जसोदाबेन को संभवतः ये पता भी नहीं है कि वे जिनके साथ रह रहीं हैं, वे तीर्थयात्रा नहीं बल्कि सुरक्षाकर्मी हैं। हालांकि बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बाल कृष्‍ण ने इस बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा है कि ये खबर पूरी तरह से भ्रामक और बेबुनियाद है।
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