जी-20 के मंच पर काले धन के मसले पर भारत के रुख को बड़ी कामयाबी मिली है।
इस समस्या से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कर सूचनाओं को साझा करने में पारदर्शिता और खुलापन लाने की दलील को सदस्य देशों से जबर्दस्त समर्थन मिला है। सदस्य देशों ने सूचना साझा करने के लिए 2017 तक नए तंत्र को क्रियान्वित करने पर अपनी मुहर लगा दी है।
दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों के संगठन जी-20 सम्मेलन के अंतिम दिन मोदी ने काले धन से पैदा हुई चुनौती से निपटने के लिए करीबी वैश्विक सहयोग की बात कही।
मोदी ने कहा कि नया तंत्र विदेश में जमा काले धन के बारे में सूचनाएं हासिल करने और उसे वापस स्वदेश ले जाने के लिए एक कारगर हथियार साबित होगा। इस तंत्र को भारत के समर्थन की घोषणा करते हुए उन्होंने दुनिया के देशों खासकर काले धन के पनाहगाह देशों से इस नई संधि के मुताबिक सूचनाएं साझा करने की अपील की।
इसके साथ ही उन्होंने सूचनाओं के आदान-प्रदान में भारत के भरपूर सहयोग का भरोसा दिलाया। दुनिया की 85 फीसदी जीडीपी पर कब्जा रखने वाले देशों के संगठन जी-20 के मंच पर मोदी ने कर चोरी के मसले पर चिंता जताते हुए कहा कि पूंजी और तकनीक की बढ़ी गतिशीलता ने कर चोरी और अर्जित लाभ को कमतर दिखाने के नए-नए तरीके ईजाद किए हैं।