चुनाव प्रचार के आखिरी दौर के खत्म होने के बाद दिल्ली के आरएसएस कार्यालय में सियासी पारा बढ़ गया है।
शनिवार शाम को बीजेपी के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय पहुंचे। जहां उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की।
मोदी के संघ प्रमुख से मुलाकात के बाद रविवार सुबह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह आएसएस कार्यालय पहुंचे और संघ के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। हालांकि इस दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत मौजूद नहीं थे।
बैठक में राजनाथ सिंह के साथ सहकार्यवाह भैय्याजी जोशी और बीजेपी मामलों को देखने वाले सुरेश सोनी शामिल हुए।
ऐसे में बड़ा सवाल यही कि आखिर संघ कार्यालय में अचानक तेज हुई बीजेपी नेताओं की इन बैठकों के पीछे क्या वजह है?
चुनाव बाद के हालात पर चर्चा
शुरुआती जानकारी के मुताबिक राजनाथ सिंह की संघ नेताओं से रविवार को हुई मुलाकात में चुनाव के बाद के हालात पर चर्चा की गई।
माना जा रहा है कि राजनाथ ने आखिरी दौर के मतदान और 16 मई को नतीजों के बाद की रणनीति पर संघ नेताओं से चर्चा की। साथ ही पार्टी की आगे की रणनीति क्या होगी इस पर भी विचार-विमर्श किया। यह बैठक करीब दो घंटे तक चली।
संघ मुख्यालय से निकलते पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इन मुलाकातों के बारे में ज्यादा कुछ बताने से इनकार कर दिया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह मुलाकात सिर्फ संघ का आभार व्यक्त करने के लिए थी। लेकिन सच्चाई ये भी है कि इस बैठक में संघ प्रमुख मौजूद नहीं थे।
संघ प्रमुख से मिले मोदी
इससे पहले शनिवार शाम को नौ चरणों के लिए चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद दिल्ली लौटे नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से भेंट की। साथ ही उन्होंने सरसंघचालक मोहन भागवत से मुलाकात की।
संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ बैठक में मोदी के अलावा भैय्याजी जोशी और सुरेश सोनी भी मौजूद थे। यह मुलाकात करीब दो घंटे तक चली।
जिसमें माना जा रहा है कि उन्होंने चुनाव के बाद के हालात पर चर्चा की और भावी रणनीति पर विचार विमर्श किया।
मुलाकात के बाद मोदी का ट्वीट
इन मुलाकातों के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, "चुनाव प्रचार में अंतिम रैली को संबोधित करने के बाद अटलजी का आशीर्वाद लिया। अभियान शुरू करने से पहले भी उनसे मिलने गया था। उनसे मुलाकात हमेशा से विशेष रहा है।"
मोदी ने अपने ब्लॉग पर भी लिखा है, ''आठ महीने में 5,800 से अधिक रैलियां और कार्यक्रम किए हैं, तीन लाख किलोमीटर की यात्रा की है, ये बड़ी संतोष देने वाली यात्रा रही।''
फिलहाल देश में चुनाव प्रचार का शोर लगभग थम गया है। सोमवार को आखिरी दौर का मतदान होना है। ऐसे में चुनाव के बाद के हालात पर चर्चा जरूरी है। शायद इसीलिए आगे की रणनीति को लेकर बीजेपी में बैठकों को दौर तेज हो गया है।