ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां कर रहे भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने इस बार दलित कार्ड खेला है। मोदी ने रविवार को कोच्चि में कहा कि वह अब भी राजनीतिक छुआछूत के शिकार हैं।
कांग्रेस पर करारा हमला बोलते हुए मोदी ने उस पर दलितों को मिले अधिकार छीनने की साजिश रचने की तोहमत भी जड़ दी। उन्होंने दावा किया कि आने वाले दस साल दलितों और पिछड़े वर्ग के होंगे।
गुजरात के सीएम रविवार को केरल के दलित समुदाय के प्रमुख संगठन केरल पुलायर महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे।
'कांग्रेस बो रही है जहर के बीज'
कार्यक्रम में कोच्चि के मेयर और कांग्रेस नेता टोनी चेमानी की गैर मौजूदगी का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि वह खुद भी राजनीतिक छुआछूत के शिकार हैं। शायद इसलिए टोनी चेमानी कार्यक्रम में नहीं आए, जबकि उनका नाम भी निमंत्रण पत्र में था।
आम चुनावों से पहले दलितों और पिछड़े वर्ग को लुभाने की कोशिश में जुटे मोदी ने कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी के जाति आधारित आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की व्यवस्था करने संबंधी बयान को लेकर भी कांग्रेस पर हमला किया।
मोदी ने कहा कि कांग्रेस 60 साल से बांटने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए रंगनाथ मिश्र आयोग के गठन से साफ है कि कांग्रेस सरकार किस तरह जहर के बीज बो रही है।
100 दिन में सत्ता परिवर्तन
मोदी ने दावा किया कि 100 दिन के अंदर केंद्र में सत्ता परिवर्तन होगा। इसके बाद कांग्रेस की सब गलत नीतियां खत्म कर दी जाएंगी। आने वाला दशक उन लोगों का होगा, जो हाशिए पर हैं।
क्या है रंगनाथ मिश्र आयोग?
रंगनाथ मिश्र आयोग का गठन यूपीए सरकार ने धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के विभिन्न मुद्दों के बारे में जानकारी जुटाने के लिए 2004 में किया था। रिपोर्ट में आयोग ने कहा था कि 10 फीसदी नौकरियां मुसलिमों और पांच फीसदी अन्य अल्पसंख्यकों के आरक्षित की जानी चाहिए।
'जानता हूं क्या झेलना पड़ता है पिछड़ों को'
मोदी ने कहा कि पिछली सदी में ज्यादातर सुधारक पिछड़े या दलित समुदाय से थे।
उन्होंने कहा कि वे बखूबी जानते हैं कि पिछड़े वर्ग को क्या क्या झेलना पड़ता है क्योंकि खुद उनकी मां ने दूसरों के घरों में बर्तन मांज कर परिवार का पेट भरा था। वह यह कहना भी नहीं भूले कि वह बचपन में रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे।
देश के राजनीतिक परिदृश्य के आकलन के बाद मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि अगले दस साल दलितों और पिछड़े वर्ग के समुदाय के होंगे।