महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव से पहले ही शुरू हो चुके महाभारत के शुरुआती दौर में शिवसेना ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को पटकनी दे दी है।
मनसे के साथ भाजपा के गठजोड़ पर शिवसेना के सख्त रुख के बाद आखिरकार भाजपा ने अपने कदम वापस खींच लिए हैं।
महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष देवेंद्र फड़नवीस ने मंगलवार शाम शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात करने के बाद यह साफ कर दिया कि उनकी पार्टी राज ठाकरे के साथ किसी भी तरह का चुनावी गठबंधन नहीं करने जा रही है।
नरेंद्र मोदी ने की बात
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा ने कभी मनसे से समर्थन नहीं मांगा था। मनसे ने खुद भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मेदवार नरेंद्र मोदी का समर्थन किया था।
उन्होंने ये भी कहा कि शिवसेना हर हाल में हमारे गठबंधन का हिस्सा है, इसलिए टकराव का कोई सवाल नहीं है। महाराष्ट्र के भाजपा प्रभारी राजीव प्रताप रूडी ने मंगलवार शाम उद्धव से मुलाकात करने के बाद मीडिया से कहा कि शिवसेना हमारी सबसे पुरानी और भरोसेमंद सहयोगी है, जो भी गलतफहमी होंगी दूर कर ली जाएंगी। हमें महाराष्ट्र में किसी और के सहयोग की जरूरत नहीं पड़ेगी।
शिवसेना सूत्रों के अनुसार सुबह भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने उद्धव से फोन पर बातचीत की थी और उसके बाद उद्धव कुछ नरम पड़े थे। उद्धव ने मोदी से कहा कि वह पूरी तरह से उनके साथ हैं, लेकिन उनकी बड़ी शिकायत भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं से है जो भ्रम की स्थिति को बना रहे हैं। उनका इशारा नितिन गडकरी की तरफ था।
उद्घव ने भाजपा से पूछा प्रश्न
उद्धव ने भाजपा से यह साफ करने को कहा था कि वह आखिर किसके साथ है। साथ ही उन्होंने कहा कि भाजपा को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर कौन वह जिम्मेदार नेता है, जिसके साथ बात की जा सकती है। उद्धव ने भाजपा से यह भी स्पष्ट करने के लिए कहा कि वह चुनावों के बाद आखिर किसके साथ रहना चाहेगी।
शिवसेना सांसद ने पार्टी छोड़ी
मावल लोकसभा सीट से शिवसेना के मौजूदा सांसद गजानन बाबर ने मंगलवार को शिवसेना छोड़ने की घोषणा की। बाबर का टिकट काटकर उद्धव ठाकरे ने श्रीरंग बारने को टिकट दिया था। इससे पहले कल्याण के सांसद आनंद परांजपे, शिर्डी के सांसद भाऊ साहेब वाकचौरे और परभनी के सांसद गणेश दूधगावकर भी शिवसेना से इस्तीफा दे चुके हैं। बाबर तीन बार पार्षद, दो बार विधायक और एक बार (मौजूदा) सांसद रहे चुके हैं।