नरेंद्र मोदी ने वडोदरा से नामांकन दाखिल करते वक्त अपनी पत्नी के नाम का खुलासा क्या किया, मेहसाणा के मोदी परिवार पर सभी की निगाहें आ टिकी हैं। यह भाजपा के पीएम पद के दावेदार का ससुराल पक्ष हैं।
मोदी का ससुराल पक्ष इन दिनों मीडिया से बचने की कोशिश कर रहा है और साथ ही अपने उस 'दामाद' के पीछे मजबूती से खड़ा है, जो देश का पीएम बनना चाहता है।
ऐसे में उनके अपने रिश्तेदार मोदी के नौजवानी के दिनों की कहानियां सुनाने में मसरूफ हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक वाडनगर और उंझा में कम्युनिटी हाउस में इन दिनों टीवी पर सिर्फ समाचार चैनल चल रहे हैं।
जशोदा के भाई, मोदी के भाई के घर में?
जाहिर है, ऐसा हो भी क्यों ना। समाचार चैनलों में इन दिनों मोदी के पत्नी का खुलासा देर से करने से जुड़ी शिकायतें और जशोदाबेन का जिक्र हो रहा है। उत्तरी गुजरात के इस हिस्से में बसने वाली एक साधारण सी रिटायर्ड स्कूल टीचर अचानक सुर्खियों में आ गई है।
उंझा में अपने घर से किराने की दुकान चलाने वाले जशोदाबेन के छोटे भाई अशोक उर्फ प्रवीण मोदी ने ऐसी जगह आसरा लिया है, जहां उम्मीद ही नहीं थी। वो इन दिनों मोदी के बड़े भाई सोमाभाई के अहमदाबाद वाले घर में ठहरे हैं।
मोदी ने अपनी पत्नी का नाम का खुलासा करीब 40 साल बाद और उनकी जिंदगी के शायद सबसे बड़े चुनावों से ऐन पहले हुआ है। अशोक ने फोन पर कहा, "मैं इन दिनों अपने समाज की ओर से दबाव झेल रहा हूं, जिनका आरोप है कि हम पैसा लेकर प्रेस को इंटरव्यू दे रहे हैं। मैं फिलहाल सोमाभाई के घर पर हूं और जल्द लौट जाऊंगा। मैं चुनाव बाद ही कुछ बोलूंगा। उससे पहले किसी भी चीज पर चर्चा की आजादी नहीं है।"
वोट नहीं डालेंगी जशोदाबेन
परिवार के मुताबिक अपने घर पर जस्सीबेन के नाम से विख्यात जशोदाबेन इन दिनों चार धाम यात्रा पर हैं, जो 17 मई को खत्म होगी। यानी चुनावी नतीजों के एक दिन बाद। वो 30 अप्रैल को शायद वोट भी नहीं डालेंगी।
उंझा में मौजूद अशोक की पत्नी जयाबेन और उनकी पुत्रवधु दक्षा का दावा है कि जशोदाबेन को इस बात की जानकारी नहीं है कि मोदी ने उनकी शादी को मान्यता दे दी है।
हालांकि, इस बात को लेकर कोई कड़वाहट नहीं दिखती कि मोदी ने लंबे वक्त तक जशोदाबेन को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं किया। इसके बजाय परिवार उस सफर का जश्न मना रहा है, जिसके तहत उन्हें उम्मीद है कि मोदी को देश की सबसे बड़ी कुर्सी मिल जाएगी।
प्राइमरी स्कूल में हुई थी मोदी-जशोदा की शादी
जशोदाबेन ज्यादातर दक्षा के घर ही रहती हैं। उन्होंने कहा, "अगर मोदी पीएम बनते हैं, तो हमें बेहद खुशी होगी। हमारे समुदाय के लिए यह गर्व की बात होगी। हम प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाएंगे और सभी विजिटर को अपने घर भोजन कराएंगे।"
हालांकि, इन दोनों महिलाओं को सटीक तौर पर यह नहीं पता कि मोदी का परिवार इन दिनों क्या कर रहा है। दक्षा ने मोदी के दो बड़े भाइयों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया, "क्या प्रहलाद हाल में चुनाव प्रचार करने बनारस में नहीं थे?"
उंझा से 20 किलोमीटर दूर ब्रह्मनवाडा में भी उत्साह का माहौल है। जशोदाबेन इसी इलाके से आती हैं। उनके सबसे छोटे भाई कमलेश मोदी काम पर गए हैं, लेकिन उनकी पत्नी सीता और उनके बेटे जय ने बताया कि सामने वाले प्राइमरी स्कूल में ही मोदी और जशोदा की शादी हुई थी।
जशोदा ने कभी मोदी के खिलाफ कुछ नहीं कहा
नरेंद्र मोदी को लेकर इस परिवार में कड़वाहट शायद इसलिए नहीं दिखती, क्योंकि जशोदाबेन ने खुद कभी उनकी आलोचना नहीं की। कुछ किलोमीटर दूर वरवादा गांव में रहने वाले उनके चचेरे भाई और किसान कांतिभाई मोदी ने कहा, "अगर सरकार में हमारे समुदाय से आने वाले किसी शख्स को इतना ऊंचा ओहदा मिलेगा, तो हमें खुशी होगी।"
उन्होंने कहा, "भाजपा रैलियों में जाने वाले अशोक मोदी से उलट हमें राजनीति में शामिल नहीं होना...विपक्षी दलों की तरफ जस्सीबेन को कई ऑफर मिले। कई लोगों ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनसे कुछ कहलवाने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया।"
कांतिभाई ने कहा, "वो सुकून से रहने वालीं धार्मिक महिला हैं। उन्होंने कभी मोदी के खिलाफ कुछ नहीं बोला और न हमने कभी ऐसा किया।" मोदी के अपने परिवार ने भी बीते लंबे वक्त से उनसे मुलाकात नहीं की, लेकिन उनके बारे में बात करने को लेकर उत्साहित रहते हैं।
सभी को गर्व है मोदी पर?
वाडनगर में मोदी के घिर के समीप उनके चचेरे भाई अशोक रहते हैं। अशोक की पत्नी विमला ने एक तस्वीर दिखाई, जिसमें उनके ससुर नरसिंहदास मोदी दिख रहे हैं, जो मोदी के पिता दामोदरदास के भाई हैं।
विमला ने कहा, "मेरे पति की पक्की नौकरी नहीं है। पिछले दो साल से वाले बच्चों के खिलौने बेच रहे हैं। और हमें काफी दिक्कत हो रही है। लेकिन मोदी परिवार में हमने किसी से संपर्क नहीं किया। मेरे पति ने किसी से भी इस बारे में बात करने से मना किया है, क्योंकि कोई हमारी मदद नहीं करेगा।"
उन्होंने कहा, "हाल में पंकजभाई यहां की कन्या से अपने बेटे की शादी करने के लिए वाडनगर आए थे, लेकिन हमारे यहां नहीं आए। हालांकि, सामाजिक आयोजनों में सोमाभाई से मुलाकात होती है।" पंकज, मोदी के सबसे छोटे भाई है। उन्होंने कहा, "हमारे समुदाय के लिए यह बेहद गर्व की बात है कि हम में से कोई पीएम बनने जा रहा है।"