गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का महाकुंभ में जाने का कार्यक्रम तय हो गया है। वे सात फरवरी को महाकुंभ क्षेत्र में पहुंचेंगे। भाजपा की स्थानीय इकाई के मुताबिक, मोदी महाकुंभ में विश्व हिन्दू परिषद द्वारा आयोजित ‘धर्म संसद’ सम्मेलन में शामिल हो सकते हैं।
वहीं, इलाहाबाद में संतों के एक समूह ने नरेंद्र मोदी के महाकुंभ में आने का विरोध शुरू कर दिया है। मोदी का विरोध कर रहे संतों का कहना है कि महाकुंभ धर्म के लिए है ना कि राजनीति के लिए। धर्म और राजनीति को एक-दूसरे से अलग रखना चाहिए। संत समाज के सदस्य स्वामी अधोक्षजानंद ने कहा कि कुंभ का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। यह लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है।
स्वामी अधोक्षजानंद ने कहा कि मोदी को महाकुंभ में आने से पहले गुजरात नरसंहार के लिए माफी मांगनी चाहिए। वह जब तक उसकी सजा नहीं भुगत लेते, तब तक उनका कोई स्वागत नहीं है।
गौरतलब है कि 6 फरवरी से विहिप के मार्ग दर्शक मंडल की कुंभ में बैठक होने वाली है। इसमें भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी शामिल होंगे।
संभावना है कि भाजपा में मोदी समर्थक लॉबी इस बैठक में मोदी का नाम प्रधानमंत्री उम्मीदवार के रूप में घोषित करवा सकती है। हालांकि भाजपा साफ कर चुकी है कि प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तय करने का अधिकार पार्टी के संसदीय बोर्ड को है और इस बार भी वही तय करेगा।