दलबदलुओं के खिलाफ निष्ठावानों के कोहराम से भाजपा के ‘मिशन 272’ के पंक्चर होने का खतरा पैदा हो गया है। 2004 में भी पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता घर बैठ गए थे और नतीजतन भाजपा के ‘फीलगुड’ अभियान की हवा निकल गई।
इस बार भी लगभग हर राज्य में बड़ी संख्या में निष्ठावान कार्यकर्ता चुनावी जंग की तैयारी में जुटने के बजाय ‘उड़ते पंछियों’ के खिलाफ सड़कों पर हैं। कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि लालकृष्ण आडवाणी व मुरली मनोहर जोशी जैसे बुजुर्ग नेता भी मन से खुश नहीं हैं।
ऐसे में भाजपा को आशंका है कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं का यह असंतोष कहीं ‘मिशन 272’ की राह का कांटा न बन जाए।
दलबदलुओं को लेकर असंतोष
खतरे को भांप भाजपा अब इस असंतोष को शांत करने में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत सबसे पहले आडवाणी को मनाने की कोशिश हुई। हालांकि यह असंतोष कम होता नहीं दिख रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं की मुश्किल है कि जो नेता कल तक भाजपा को कोसते रहते थे, अब चुनावी जंग में उन्हें ही लोकसभा पहुंचाने के लिए काम करना होगा।
उत्तर प्रदेश की 80 में से 70 सीटों के लिए घोषित उम्मीदवारों में से 31 बाहरी या दलबदलू हैं। सिर्फ जगदंबिका पाल, बृजभूषण शरण सिंह, कीर्तिवर्द्धन सिंह ही नहीं हैं, जिनका विरोध हो रहा है। पाल को भाजपा में शामिल होने के मात्र कुछ घंटे बाद ही मैदान में उतार दिया गया।
इसी तरह पार्टी में शामिल होने के मात्र तीन दिन बाद ही अशोक दोहरे को इटावा से प्रत्याशी बना दिया गया। बिजनौर से उम्मीदवार बनाए गए नेता को लेकर कहा जा रहा है कि उन्हें पंजाब के एक विवादित बाबा के कहने पर टिकट मिला है। वे उस बाबा के अकाउंटेंट थे। उम्मीदवार घोषित करने के बाद ही उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली।
नाराज नेताओं की सूची बहुत लंबी
महेंद्रनाथ पांडेय, वीरेंद्र मस्त, रामचरित निषाद, भारत सिंह, छोटे लाल खैरवार के खिलाफ भी कार्यकर्ता बगावत कर चुके हैं। बिहार में रामकृपाल यादव, सुशील कुमार सिंह समेत कई नेता हैं जिनका विरोध हो रहा है। गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह हों या मथुरा से हेमा मालिनी, या चंडीगढ़ से किरण खेर।
इन सभी के लिए ये चुनाव क्षेत्र बिलकुल अनजान हैं। दिल्ली में उदित राज, महेश गिरि व मनोज तिवारी को भी कार्यकर्ता स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। महाराष्ट्र में हिना गावित भी इसी श्रेणी में हैं। इस तरह की सूची बहुत लंबी है। दूसरी तरफ पार्टी में आडवाणी, जोशी, लालजी टंडन के बाद अब नाराज नेताओं की सूची में जसवंत सिंह का नाम भी शामिल हो गया है।
भाजपा भी मान रही है कि मोदी की लहर के बावजूद यदि नाराज कार्यकर्ता चुनाव प्रचार करने के बजाय घर बैठ गया तो मिशन 272 को परवान चढ़ाना मुश्किल हो सकता है।