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मोदी के मंत्री बोले, 'जनता परिवार ने कड़ा किया मुकाबला'

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भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह भले ही जद(यू) और राजद के एक होने को शून्य के शून्य से मिलना कहकर खारिज कर रहे हों, लेकिन केंद्र सरकार में मंत्री उपेंद्र कुशवाहा का कहना है कि जनता परिवार के विलय के बाद बिहार में मुकाबला पहले की अपेक्षा ज्यादा कड़ा होगा।
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लालू प्रसाद यादव के प्रतिबद्ध जनाधार और राज्य की जनता पर नीतीश कुमार के मन मनोवैज्ञानिक प्रभाव को खारिज नहीं किया जा सकता। इसलिए एनडीए को मजबूती और एकजुटता से चुनाव लडऩा होगा, लेकिन भाजपा अगर चुनाव में अकेले लड़ते हुए दिखेगी तो लड़ाई मुश्किल होगी।

कुशवाहा ने भाजपा और संघ परिवार के कुछ नेताओं के कट्टर हिंदुत्ववादी बयानों पर तत्काली रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि अगर यह बयानबाजी जारी रही तो बिहार में इसका खामियाजा भाजपा और एनडीए को भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि बिहार के लोग धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर बेहद सतर्क और संवेदनशील हैं।
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अमर उजाला से खास बातचीत में एनडीए के घटक राष्ट्रीय लोक समाज पार्टी के अध्यक्ष और केंद्रीय मानव संसाधन राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि जनता में संदेश देना होगा कि भाजपा नहीं एनडीए चुनाव लड़ रहा और चुनाव में तीनों घटक दलों की समुचित भागीदारी है जीत मुश्किल नहीं होगी।

बिहार में गठबंधन ही है सफलता की कूंजी

लेकिन अगर भाजपा और विशेषकर बिहार भाजपा के नेता जिस तरह खुद को प्रोजेक्ट करते हैं उससे जनता में गलत संदेश जाता है। अगर यही रवैया जारी रहा तो चुनाव जीतना आसान नहीं होगा।

क्योंकि बिहार की सामाजिक राजनीतिक स्थिति ऐसी है कि दोनों ही तरफ कोई एक दल नहीं बल्कि गठबंधन ही चुनाव मजबूती से लड़ सकते हैं। किसी एक नेता को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाने के सवाल पर कुशवाहा ने कहा कि इसका फैसला भाजपा और एनडीए के नेता परस्पर बातचीत के बाद करेंगे।

‍बिहार भाजपा नेताओं के बीच जारी घमासान पर चिंता व्यक्त करते हुए कुशवाहा ने कहा कि जिस तरह प्रदेश भाजपा के नेता बंटे हुए दिखाई देते हैं उसका चुनाव में गलत असर पड़ सकता है। भाजपा के कई नेता आपस में भिड़ते हुए दिखते हैं, यह ठीक नहीं है।

भाजपा और पूरे एनडीए में एकजुटता है, इसका संदेश देकर ही हम विरोधियों का मुकाबला कर सकते हैं। कुशवाहा के मुताबिक बिहार चुनाव में एनडीए को नकारात्मक सोच के साथ नहीं बल्कि केंद्र सरकार की उपलब्धियों के सकारात्मक सोच के साथ उतरना चाहिए।
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बिहार में भी मोदी के नाम का रही रहेगा सहारा

बिहार सरकार की असफलताओं से ज्यादा हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोच, केंद्र सरकार की सफलताओं और भविष्य में एनडीए बिहार के लिए क्या कर सकता है इस पर जोर देना होगा।

‍बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को नीतीश कुमार द्वारा चुनावी मुद्दा बनाने पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बिहार की जनता समझ चुकी है कि नीतीश कुमार की राज्य के विकास में कोई रुचि नहीं है।

वह यह मांग सिर्फ अपनी राजनीति के लिए कर रहे हैं। बिहार को आंध्र प्रदेश की तर्ज पर पैकेज देने की घोषणा वित्त मंत्री बजट भाषण में कह चुके हैं। केंद्र सरकार बिहार के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और उसे विशेष सहायता दी जाएगी।

बिहार में सीट बंटवारे पर कुशवाहा का कहना है कि एनडीए के तीनों घटक दलों को राज्य के हर इलाके में सीटें मिलनी चाहिए जिससे पूरे राज्य में एनडीए की एकजुटता का संदेश जाए।
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