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विरोध पर झुकी मोदी सरकार, भूमि अध्यादेश में होगा बदलाव!

Thu, 05 Mar 2015 11:27 AM IST
एम संजय/अमर उजाला, नई दिल्ली
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भूमि अधिग्रहण अध्यादेश पर मोदी सरकार के खिलाफ बना माहौल रंग लाता दिख रहा है। सरकार अब अध्यादेश में बदलाव को तैयार हो गई है। अध्यादेश के प्रावधानों को लेकर सरकार अपने साथियों के साथ संघ से जुड़े संगठनों का भी विरोध झेल रही है। उत्तर प्रदेश के कुछ सांसदों ने पार्टी आलाकमान के सामने इस बारे में चिंता जताई थी। अब सरकार खुद अपनी ओर से इससे संबंधित विधेयक में बदलाव ला रही है।
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सोमवार को संशोधन के साथ भूमि अधिग्रहण विधेयक लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है। विधेयक बुधवार की कार्यसूची में ही शामिल था, लेकिन सरकार ने इसे पेश नहीं किया। एक आला मंत्री

का कहना है कि विधेयक को अध्ययन और बदलाव के लिए रोक लिया गया। इसे सोमवार को लोकसभा में रखा जाएगा। सरकार इसे सोमवार को ही लोकसभा में पारित कराने की कोशिश करेगी।
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अमर उजाला सरकार के इस प्रयास को सबसे पहले ही प्रकाशित कर चुका है। उक्त मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि विपक्षी और सहयोगी दलों के सुझाव को संशोधन में शामिल किया जाएगा, लेकिन इसके मूल में बदलाव नहीं होगा। सरकार ने अन्य सियासी दलों के अलावा किसान संगठनों से भी इस पर राय ली है।

विपक्षी नेताओं और संघ को साधने में जुटी भाजपा

सूत्रों के अनुसार सरकार की ओर से विपक्षी दलों समेत सहयोगियों को साधने का जिम्मा वित्त मंत्री अरुण जेटली, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को दिया गया है। सिंह ने जहां तृणमूल, बीजद, सपा और बसपा नेताओं को साधने का जिम्मा संभाला है, वहीं सुषमा के जिम्मे शिवसेना और जदयू को साधने की जिम्मेदारी है। गडकरी ने शिवसेना से बातचीत की है। वहीं, जेटली अन्नाद्रमुक, अकाली दल के अलावा कांग्रेस से साथ सहमति बनाने की कोशिश करेंगे।

संघ के संगठनों से बातचीत खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह करेंगे। कहा जा रहा है कि विदेश से लौटने के तुरंत बाद जेटली संशोधनों के बारे में कांग्रेस नेताओं से चर्चा करेंगे। हालांकि, कांग्रेस यह साफ कर चुकी है कि वह यूपीए सरकार में बनाए गए कानून में बदलाव के खिलाफ है। वैसे सरकार को भरोसा है कि उसकी मेहनत रंग लाएगी। अन्नाद्रमुक, बीजद और एनसीपी सरीखे दल सरकार का साथ देंगे। मंगलवार को उत्तर प्रदेश के सांसदों की नाराजगी झेलने के बाद बुधवार को अमित शाह ने भूमि अधिग्रहण पर बनाई आठ सदस्यीय समिति से मुलाकात की।

व्यापक बदलाव कर सकती है सरकार
मान जा रहा है कि सरकार विधेयक में पीपीपी मॉडल के अंतर्गत जमीन पर मालिकाना हक, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की सीमा निर्धारित करने और प्राईवेट स्कूल और अस्पताल से किनारा करने के साथ सहमति के मामले को सामाजिक प्रभाव अध्ययन के अंतर्गत ला सकती है।

अध्यादेशों का रास्ता रोकने की तैयारी

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर विपक्ष के संशोधनों पर सरकार के पराजित होने के बाद अब सरकार के सामने मुश्किलों का पहाड़ टूट गया है। बीमा, कोयला, खनन और भूमि अधिग्रहण जैसे अध्यादेशों का रास्ता राज्यसभा में पथरीला हो गया है। कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए बीमा अध्यादेश के मुद्दे पर भी यूटर्न लेकर विरोध करने की ठान ली है जबकि माकपा, तृणमूल कांग्रेस, सपा, जदयू, बसपा जैसे विपक्षी दलों ने सरकार की मुहिम को विफल करने का फैसला कर लिया है।

बीम विधेयक के अलावा भूमि अधिग्रहण के अध्यादेश को भी रोकने की रणनीति कांग्रेस और बाकी विपक्षी दलों ने बना ली है। विपक्षी दलों की ओर से संशोधनों की झड़ी लगाने की तैयारी है। दूसरी तरफ सरकार विपक्ष को मनाने की कोशिश में है मगर वह सफल नहीं हो पा रही है। विपक्ष के नेताओं का कहना है कि सरकार बात करने के बजाय हमलावर रुख अपना रही है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सरकार संसद के संयुक्त सत्र की बात कर अध्यादेश को पारित कराने की बात कर रही है, तो हम भी अब सभी विधेयक, चाहे वो सामान्य कामकाज से जुड़ा ही क्यों न हो, उसे संसद से पारित कराने नहीं देंगे। हर काम के लिए सरकार को संसद का संयुक्त सत्र बुलाना होगा। लोकसभा में भूमि अधिग्रहण विधेयक पेश किया जाएगा। फिर उसके बाद उसे राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा। उससे पहले सोमवार को सरकार की ओर से कोयला और खनन पर अध्यादेश विधेयक पेश किया जा सकता है। कुल मिलाकर अगला हफ्ता सरकार के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

बीमा विधेयक पर भी बढ़ी तकरार
बीमा अध्यादेश को लेकर विपक्ष का तर्क है कि राज्यसभा में बीमा विधेयक लंबित पड़ा है। ऐसे में सरकार ने कैसे लोकसभा में इसे पेश कर पारित करा लिया। पार्टी इसे असंवैधानिक कह रही है। सरकार का तर्क है कि लोकसभा में पारित किया गया बीमा विधेयक संशोधित बिल है। वह राज्यसभा के बिल जैसा नहीं है और यह नियमों के मुताबिक है। मगर विपक्ष अपनी बात पर अड़ा हुआ है इसलिए बीमा अध्यादेश के मुद्दे पर टकराव होना तय है।
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कांग्रेस पीएम के खिलाफ ला सकती है विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर संसद को गुमराह करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री ने मंगलवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए सदन को गलत और भ्रामक जानकारी दी।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार को असहज करने के लिए पार्टी प्रधानमंत्री के खिलाफ सोमवार को विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव ला सकती है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्यसभा में प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान यह दिखाने की कोशिश की कि यूपीए सरकार के दौरान शुरू किए गए काम पूर्व की एनडीए सरकार में शुरू किए गए थे।

पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने जो भी काम गिनाए वे यूपीए सरकार की देन हैं और कांग्रेस की अवधारणा पर ही शुरू हुए हैं जबकि मोदी सरकार ने श्रेय लेने का प्रयास किया है। सिंघवी ने तर्क दिया कि संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना वाजपेयी सरकार ने जरूर शुरू की थी। लेकिन उसका महात्मा गांधी रोजगार ग्रामीण कानून से कोई मुकाबला नहीं है। उन्होंने कहा कि मनरेगा वैधानिक अधिकार है। हमने लोगों को रोजगार का कानूनी अधिकार दिया।

पार्टी का कहना है कि सर्व शिक्षा अभियान भी यूपीए सरकार ने शुरू किया लेकिन मोदी सरकार इसे भी अपना बनाकर पेश कर रही है। प्रधानमंत्री को घेरने के लिए कांग्रेस ने पूरी कोशिश कर ली है। पार्टी के शीर्ष मैनेजरों का कहना है कि लोकसभा में सरकार अपने बहुमत के बल कांग्रेस को नजरअंदाज कर रही है इसलिए राज्यसभा में सरकार को बैक फुट पर धकेलने की पूरी कोशिश है।
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