सोमवार से विधिवत केंद्र का शासन संभालने जा रही भाजपा देशभर के मध्यम वर्ग खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों को इनकम टैक्स में छूट का तोहफा देने जा रही है।
लोकसभा चुनाव के दौरान इनकम टैक्स खत्म करने की बहस शुरू करने वाली भाजपा के नेतृत्व में बनने जा रही सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी आम बजट में आयकर छूट सीमा बढ़ा सकते हैं।
नई सरकार को जून-जुलाई तक संसद में आम बजट पेश करना है। यूपीए सरकार ने अंतरिम बजट पेश किया था। इसलिए सरकार की कमान थामने के बाद मोदी की पहली चुनौती लोकलुभावन बजट देने की होगी।
इनकम टैक्स कम करने को लेकर भाजपा पर दवाब
इसमें अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के उपाय भी दिखाने होंगे, लेकिन भाजपा चाहती है कि सरकार सबसे पहले इनकम टैक्स मामले में लोगों को राहत दे। इसलिए अब टैक्स सुधारों में तेजी लाने के साथ ही इनकम टैक्स में छूट सीमा बढ़ना तय माना जा रहा है।
अभी दो लाख रुपये तक की आमदनी पर इनकम टैक्स छूट है, लेकिन भाजपा की कोशिश है कि इस सीमा में कम से कम एक लाख रुपये का इजाफा कर दिया जाए। इससे भाजपा को मध्य वर्ग खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों को खुश करने का मौका मिलेगा।
वैसे भी भाजपा का एक बड़ा वर्ग इनकम टैक्स खत्म करने का पक्षधर है। वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी इसे खत्म करने की वकालत करते रहे हैं।
पार्टी के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने वाले पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी को भी पुणे के एक संगठन ने आयकर समाप्त करने को लेकर सुझाव दिए थे।
मोदी का जंबो मंत्रिमंडल नहीं होगा
भाजपा से मिल रहे संकेतों से साफ है कि सरकार का खर्चा घटाने की रणनीति के तहत मोदी का जंबो मंत्रिमंडल नहीं होगा। वैसे भी अभी राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.6 फीसदी है और खुद देश की सकल घरेलू विकास दर पांच फीसदी से कम है।
ऐसे में मंत्रिमंडल का आकार छोटा रखने जा रहे मोदी कई मंत्रालयों का आपस में विलय कर सकते हैं। मसलन, ऊर्जा से संबंधित मामले एक ही मंत्रालय में आ सकते हैं। इसी तरह रेल, सड़क परिवहन, ग्रामीण सड़क जैसे मामले भी प्रस्तावित बुनियादी ढांचा मंत्रालय के तहत लाए जा सकते हैं।
जल संबंधी मामले भी कई मंत्रालयों में बंटे हैं। इन्हें भी एक ही छत के नीचे लाने की बात हो रही है। इससे मंत्रालयों के आंतरिक विवाद भी घटेंगे व फाइलें भी तेजी से दौड़ेंगी।