दाल का उत्पादन कम होने से बढ़ी कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने आगामी खरीफ मौसम के लिए दलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एसएसपी) में 275 रुपये प्रति क्विंटल का भारी इजाफा किया है।
इसमें 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस का हिस्सा भी शामिल है। अरहर, मूंग और उड़द की एमएसपी में बोनस को छोड़ दें तो 75 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।
दलहन के साथ-साथ तिलहन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए इनका एमएसपी भी काफी बढ़ाया गया है। वहीं धान की खेती करने वाले किसानों को ज्यादा खुशी नहीं हुई।
धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में महज 50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जबकि सरकार के कई सांसदों और मंत्रियों ने धान का एमएसपी कम से कम 100 रुपये बढ़ाने की मांग की थी। 200 रुपये के बोनस के साथ वर्ष 2015-16 के लिए अरहर का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4,625 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
कृषि मंत्री का ऐलान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति में न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने वर्ष 2015-16 में खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का ऐलान किया।
समर्थन मूल्य के निर्धारण में सरकार ने ऐसी नीति का पालन किया है, जिससे अनाज की खेती के बजाय किसानों का रुझान दाल और तिलहन की खेती के तरफ आकर्षित हो। यही वजह है कि दलहन के दामों में बोनस के साथ भारी वृद्धि की गई है। आम आदमी की थाली के सबसे अहम आहार में शामिल दाल की महंगाई ने सरकार की चुनौती बढ़ा दी है।
इस साल दाल की बढ़ी कीमतों को काबू में लाने की इस चुनौती को देखते हुए सरकार ने पहले ही 5 हजार टन दाल विदेशों से आयात करने का आर्डर दे दिया है। अगले साल दाल की महंगाई सरकार की मुसीबत न बढ़ा दे इसलिए किसानों को दलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया है।
इसीलिए दलहन की फसलों में एमसपी में 75 रुपये के इजाफे के साथ 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस का प्रोत्साहन देने का फैसला लिया गया है। कृषि मंत्री ने कहा है कि दालों पर 200 रुपये के बोनस देने से किसानों को एक मजबूत संदेश जाएगा और वे दाल की खेती में निवेश करेंगे। धान के मूल्य में महज 50 रुपये की वृद्धि के साथ न्यूनतम समर्थन मूल्य 1410 रुपये निर्धारित किया गया है। अब सामान्य धान की खरीद 1410 रुपये प्रति क्विंटल होगी। तो ग्रेड ए के धान का मूल्य 1450 निर्धारित किया गया है।
किसमें कितना हुआ इजाफा
दलहन और तिलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बड़ी बढो़तरी के मामले में सरकार का तर्क है कि धान और गेहूं के मामले में देश आत्मनिर्भर है। मगर घरेलू खपत के लिए दाल और तिलहन का आयात करना पड़ता है।
इसलिए उसका जोर दलहन एवं तिलहन का उत्पादन बढ़ाने पर है। इसके खेती में पानी की भी कम लागत होती है। जबकि धान की खेती में पानी की खपत ज्यादा होती है। सरकार इसे जल संकट से बचने का भी कारगर उपाय मान रही है। साथ में उसका तर्क है कि धान पर कम दाम देने से इसकी खेती हरियाणा और पंजाब से हटकर पूर्व के राज्यों में ज्यादा बढ़ेगी।
हालांकि किसानों के सामने दिक्कत यह है कि धान और गेहूं की खरीदारी तो सरकार कर लेती है। मगर दाल और तिलहन के रखरखाव और खरीदारी का ढांचा निचले स्तर पर मजबूत नहीं है।
एक नजर
खरीफ की अहम फसलें वर्ष 2015-16 का न्यूनतम समर्थन मूल्य:-
धान - सामान्य 1410(ग्रेड ए-1450),
ज्वार - हाईब्रीड 1570 (मलडांडी-1590),
बाजरा - 1275
मक्का - 1325
रागी - 1650
अरहर - 4625 (20 चीन, बोनस शामिल)
मूंग - 4850 (200 रु. बोनस शामिल)
उड़द - 4625 (200 रु. बोनस शामिल)