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जाट आरक्षण पर अब यह दांव आजमाएगी सरकार

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जाट आरक्षण पर देश की सियासत फिर से गरम हो गई है। सुप्रीम कोर्ट से जाट आरक्षण निरस्त होने के बाद बृहस्पतिवार को 70 सदस्यीय जाट प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से अलग-अलग मुलाकात की।
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प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अध्ययन के बाद इस मामले का कानूनी हल निकालने का भरोसा दिया है। प्रतिनिधिमंडल ने पीएम मोदी से इस मामले का राजनीतिक या कानूनी हल निकालने की मांग की।

जाट नेताओं ने दावा किया कि यह समुदाय आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ा होने के कारण सामाजिक न्याय के तहत आरक्षण का हकदार है। प्रधानमंत्री ने मामले को सुलझाने का जिम्मा वित्त मंत्री अरुण जेटली को दिया है।
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जेटली सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अध्ययन के बाद आरक्षण बहाल रखने के विकल्पों की जानकारी प्रधानमंत्री को देंगे। जेटली के सुझाव के बाद ही सरकार इस फैसले को बड़ी पीठ को चुनौती देने पर फैसला करेगी।
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मैने इस बिरादरी को कभी हताश नहीं देखा

पीएम मोदी से मुलाकात कर लौटे प्रतिनिधिमंडल में मेरठ से गए अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मानवेंद्र वर्मा ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि हम लोगों की बात सुनने के बाद प्रधानमंत्री बोले कि आरक्षण का मामला तो ठीक हैं, लेकिन यहां बैठे समाज के हर नेता के चेहरे उतरे से दिखाई दे रहे हैं....ऐसी क्या बात हो गई?

मैने इस बिरादरी के चेहरे पर कभी इस तरह की हताशा और शिकन नहीं देखी। मोदी ने अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि वे हरियाणा में प्रचारक रहने के दौरान अक्सर जाटों के यहां रुकता था। थे। कहा, विपरीत परिस्थिति में भी कभी जाटों के चेहरे पर हताशा और शिकन नहीं देखी। मोदी की ये बातें सुनकर हाल ठहाकों से गूंजने लगा।

प्रधानमंत्री से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह, संजीव बालियान, सांवरमल जाट, हरियाणा सरकार में मंत्री ओमप्रकाश धनखड़, कैप्टन अभिमन्यु, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सतपाल मलिक, सभी जाट सांसद, जाट संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक, मानवेंद्र वर्मा, राजेश टिकैत, जाट महासभा के युद्धबीर सिंह, जाट आरक्षण संघर्ष समिति के ज्ञानेंद्र चौधरी सहित कई खापों के प्रमुख शामिल थे।
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