भले ही 13 के अंक को दुनिया भर में अशुभ माना जाता हो, मगर भाजपा के लिए यह अंक कई बार सुखद अवसर बन कर आया है।
यही कारण है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के लिए पार्टी ने 13 सितंबर का दिन तय किया।
कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस दिन घोषणा करने के लिए पार्टी नेतृत्व ने आडवाणी के विरोध की भी परवाह नहीं की।
दरअसल भाजपा के साथ तेरह के आंकड़े का संयोग बेहद सुखद रहा है। ऐसा इसलिए है कि अटल बिहारी वाजपेयी की पहली सरकार 13 दिन तक चली थी। इसके बाद दूसरी बार बनी वाजपेयी की सरकार तेरह महीने चली।
जयललिता के समर्थन के बाद जब सरकार गिरी तो तीसरी बार वाजपेयी के नेतृत्व में 13 अक्तूबर 1999 को ही नई सरकार बनी।
वाजपेयी ने इसी दिन तीसरी बार पीएम पद की शपथ ली थी। यही कारण है कि मोदी की उम्मीदवारी की घोषणा करने के लिए 13 के आंकड़े का खास ख्याल रखा गया।
कुछ नेताओं का कहना था कि इसी 13 के आंकड़े को हासिल करने के लिए शुक्रवार को पार्टी नेतृत्व ने आडवाणी के विरोध तक की परवाह नहीं की।
नेतृत्व को लगता था कि आडवाणी के विरोध के कारण अगर शुक्रवार को मोदी की ताजपोशी टाली गई तो भविष्य में इस आंकड़े से तालमेल बिठा पाना मुश्किल हो सकता है।