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आखिरकार शरीफ से मिलेंगे मोदी, क्या बातें होंगी?

Fri, 10 Jul 2015 08:47 AM IST
एजेंसी/ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
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पड़ोस से रिश्ते सुधारने की भारत की पहल एक बार फिर रंग लाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ की बहुप्रतीक्षित मुलाकात रूस के उफा में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन से इतर होगी। आखिरकार भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की।
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माना जा रहा है शरीफ से मुलाकात में पीएम मोदी सीमापार आतंकवाद का मुद्दा उठा सकते हैं और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्ते और उसकी भावी दिशा पर भी बातचीत कर सकते हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने अपने एक ट्वीट में इस मुलाकात की जानकारी देते हुए कहा, ‘यह सही है कि पीएम नरेंद्र मोदी और पीएम नवाज शरीफ शुक्रवार को सुबह सवा नौ बजे एससीओ सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे।’
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बेतुके बयानों से रिश्तों में आई खटास

यह पुष्टि उस समय आई है, जब इससे कुछ घंटे पहले ही विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा था कि दोनों नेताओं की मुलाकात की संभावनाएं हमेशा मौजूद हो सकती हैं।

एक तरफ जहां दोनों देशों के बीच वार्ता की बहाली की कोशिशें की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर हाल ही में पाक के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बेतुके बयान से दोनों देशों के रिश्तों में और खटास आ गई।

जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार का इस्तेमाल का भी विकल्प खुला हुआ है। हालांकि पाक के इस बड़बोलेपन का जवाब देते हुए रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने कहा कि भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा करने में सक्षम है।

पिछले साल हुई थी मुलाकात

मोदी और शरीफ की पिछली मुलाकात नेपाल की राजधानी काठमांडू में नवंबर में हुए दक्षेस देशों के सम्मेलन के दौरान हुई थी, मगर यह मुलाकात द्विपक्षीय नहीं थी।

दोनों देशों के रिश्ते उस समय और तल्ख हो गए, जब बांग्लादेश के दौरे पर गए पीएम मोदी ने पाक पर भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया था।

इसके बाद भारतीय सेना के म्यांमार में घुसकर आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों द्वारा दिए गए कड़वाहट भरे बयानों से भी रिश्तों में और दरार आ गई थी।

मोदी ने दिया था प्रस्ताव

इस्लामाबाद में पाकिस्तान के विदेश विभाग के प्रवक्ता काजी खलीलुल्लाह ने बताया कि मोदी और शरीफ के बीच अहम द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि भारत ने एक ऐसी मुलाकात का प्रस्ताव दिया था, जिस पर पाकिस्तान ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है।

वहीं राजनयिक सूत्रों ने बताया कि दरअसल पाक से वार्ता की बहाली मोदी की कोशिशों का नतीजा है, वह भी ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच बातचीत के दरवाजे बंद हो चुके थे।

इससे पहले पवित्र रमजान की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने फोन कर शरीफ को मुबारकबाद दी और शांतिपूर्ण और द्विपक्षीय रिश्ते की जरूरत बताई थी। मोदी ने पाक मछुआरों की रिहाई के भारत के फैसले की शरीफ को जानकारी दी थी।

बातचीत पटरी पर लाने को इच्छुक है भारत

साउथ ब्लॉक के सूत्रों ने बताया कि दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच द्विपक्षीय बैठक का होना बताता है कि भारत बातचीत की प्रक्रिया को फिर से पटरी पर लाने का इच्छुक है, भले ही इसका कोई सार्थक नतीजा न निकले।

पिछले साल मई में अपने शपथ ग्रहण समारोह के वक्त मोदी ने सभी दक्षेस देशों के नेताओं को न्योता दिया था, मगर भारत ने पाक से बातचीत उस वक्त बंद कर दी थी, जब नई दिल्ली में पाक उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कश्मीर के अलगाववादी हुर्रियत नेताओं से मुलाकात की थी।

रणनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक मोदी सरकार ने इस मामले में पाक के साथ एक खास नीति अपनाई है, जिसके तहत एनडीए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए पाक से वार्ता बहाली में कोई नुकसान नहीं है।
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पीएम ने दिया फुटबॉल मीट का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को ब्रिक्स सम्मेलन के संबोधन के दौरान सदस्य देशों के बीच फुटबॉल को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स स्पोर्ट्स काउंसिल के साथ फुटबॉल मीट के आयोजन का प्रस्ताव भी दिया।

उन्होंने सलाह दी कि बेहतर हो कि अगर पहला फुटबॉल आयोजन भारत में हो, क्योंकि भारत अगले ब्रिक्स सम्मेलन का मेजबान देश होगा।
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