फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एएमयू, जामिया विवि पर विपक्ष एकजुट, भाजपा ने स्पष्ट की स्थिति

विज्ञापन
विज्ञापन
हैदराबाद के छात्र रोहित की आत्महत्या को लेकर दलित विरोधी होने का सियासी आरोप झेल रही भाजपा ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) मामले में विवाद बढ़ने से पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने कहा है कि एएमयू मामले में वह पहले की सरकारों के रास्ते का अनुसरण कर रही है।
विज्ञापन


पार्टी प्रवक्ता एम जे अकबर ने मामले पर भाजपा की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर पार्टी विरोध में नहीं है। लेकिन कानूनी रूप से यह संभव नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर पलटी मारने का आरोप लगाते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने एक नेता के पत्र के दबाव में आकर एएमयू मामले में अपनी स्थिति बदली है।

अकबर ने कहा कि एएमयू के अल्पसंख्यक स्थिति पर केंद्र सरकार ने पुराने सरकार के पदचिह्नों  का अनुकरण किया है। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक देश में जितने भी प्रधानमंत्री हुए सबने एएमयू की अल्पसंख्यक स्थिति पर यही रुख अपनाया है।
विज्ञापन

अधिनियम का दिया हवाला, मूल स्वरूप में बदलाव से इनकार

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा प्रदान नहीं किया जा सकता है। यह केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत बनी है। उसके तहत बने विश्वविद्यालय का स्वरूप सेक्यूलर ही रहेगा। कानून में इस बात का प्रावधान है कि केंद्रीय अनुदान से चलने वाला कोई भी विश्वविद्यालय धार्मिक नहीं हो सकता है।

उन्होंने कहा कि पहले भी इस बात का प्रयास हुआ था कि एएमयू को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए। लेकिन तब की सरकार ने भी कानून का पक्ष लेते हुए प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम के विश्वविद्यालय सूची में एएमयू, बीएचयू और दिल्ली विश्वविद्यालय का नाम दर्ज है। इनके मूल स्वरूप में बदलाव नहीं हो सकता है।
विज्ञापन

विपक्षी दलों ने की सरकार की आलोचना

वहीं कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों समेत आठ राजनीतिक दलों ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को खत्म करने के सरकार के कथित ‘कुटिल’ प्रयासों की और अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी की आलोचना की है।

कांग्रेस के सांसद प्रमोद तिवारी, जदयू के  केसी त्यागी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के डीपी त्रिपाठी , माकपा की रीताब्रता बनर्जी, भाकपा के डी. राजा, तृणमूल कांग्रेस के सुखेंदू शेखर रॉय, राष्ट्रीय जनता दल के जयप्रकाश यादव तथा आम आदमी पार्टी के भगवंत मान की ओर से शुक्रवार को एक संयुक्त बयान जारी किया गया।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि देश के धर्मनिरपेक्ष ताने बाने को ध्वस्त करने वाले इस कदम के विरोध में वे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मिलेंगे और इस मुद्दे को संसद के आगामी सत्र में उठाएंगे। सांसदों ने इस मामले में हस्ताक्षर अभियान चलाने की भी घोषणा की। सांसदों ने अटॉर्नी जनरल के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में यह कहा था कि ये दोनों संस्थान अल्पसंख्यक संस्थान नहीं हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें