प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही अपनी सरकार के मंत्रियों और सांसदों को संसद की कार्यवाही को गंभीरता से लेते हुए सदैव हाजिर होने की सख्त नसीहत दी हो। मगर उनकी ये नसीहत भी काम नहीं आ पा रही है।
दरअसल, मंगलवार को राज्यसभा में सदन की कार्यवाही को सिर्फ इसलिए दो बार स्थगित करना पड़ा क्योंकि सदन में एक भी मंत्री नहीं था। न कैबिनेट मंत्री और न ही राज्य मंत्री। विपक्ष ने इसका जोरदार विरोध किया तो उपसभापति पीजे कुरियन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सवाल उठाया।
सत्तापक्ष भाजपा की ओर से तर्क दिया गया कि लोकसभा में न्यायिक नियुक्ति आयोग बिल पर वोटिंग हो रही है। इसलिए मंत्री दूसरे सदन में है।