केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री प्रो. सांसद रामशंकर कठेरिया के फर्जी मार्कशीट प्रकरण ने विपक्षियों के हाथ में विरोध का मुद्दा थामा दिया है। मामला सुर्खियों में है। इस पर जबरदस्त राजनीति शुरू हो चुकी है। भाजपा पर शब्दों के तीर तो चल ही रहे हैं और राज्यमंत्री पर हुए अब तक के मुकदमों की कुंडली भी तैयार की जा रही है।
मुकदमा नंबर---1
बसपा प्रत्याशी रहे कुंवर चंद वकील ने 2010 में थाना हरीपर्वत में कठेरिया के खिलाफ अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर चुनाव लड़ने के आरोप में तहरीर दी थी। कहा था कि 1996 से 1999 तक कठेरिया इटावा में रीडर थे। स्नातकोत्तर विद्यालय इटावा के तत्कालीन प्राचार्य ने लिखित में दिया था कि उनके दस्तावेजों में अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र नहीं है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। चार्जशीट के बाद उन्हें सीजेएम कोर्ट में तलब किया, लेकिन वे हाजिर नहीं हुए। इस पर गैरजमानती वारंट भी जारी हुआ। कठेरिया ने हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने स्थानीय न्यायालय में हाजिर होने का आदेश दिया। तब उन्होंने जमानत कराई। कठेरिया ने हाईकोर्ट के आदेश पर रिवीजन दाखिल किया है। कोर्ट दो दिसंबर 2014 को सुनवाई करेगी।
मुकदमा नंबर....2
कठेरिया के खिलाफ थाना एत्मादपुर में विद्युत विभाग के अवर अभियंता रनवीर सिंह ने मारपीट, बलवा और सरकारी कार्य में बाधा डालने का मुकदमा मार्च 2011 में दर्ज कराया गया है। आरोप है कि उन्होंने समर्थकों के साथ विद्युत उपकेंद्र में घुसकर कर्मचारियों से अभद्रता, मारपीट करते हुए सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई थी। विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी गई है। अगली सुनवाई 15 नवंबर 2014 को होगी।
मुकदमा नंबर....3
थाना एत्मादपुर में ही कठेरिया के खिलाफ अप्रैल 2014 में एक और मामला दर्ज है। थाना अध्यक्ष हेमपाल सिंह रिपोर्ट दर्ज कराई है। आरोप है कि वे अपने समर्थकों के साथ आए और नारेबाजी करते हुए कर्मचारियों के साथ अभद्रता करने लगे। पुलिसवालों ने समझाने की कोशिश की तो गालीगलौज की और सरकारी कार्य में बाधा डाली। इस मामले में भी चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। सुनवाई 17 नवंबर 2014 को होगी।
बसपा बनाएगी चुनावी मुद्दा
राज्यमंत्री प्रो. रामशंकर कठेरिया के फर्जी मार्कशीट प्रकरण को बसपा ने चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी की है। बसपा के आगरा-अलीगढ़ मंडल जोनल कोआर्डिनेटर सुनील कुमार चित्तौड़ ने कहा कि राज्यमंत्री से भाजपा को तुरंत इस्तीफा लेना चाहिए। छलकपट के आरोपों से घिरे प्रो. कठेरिया मंत्रालय में क्या अपने जैसे लोगों को ही तैयार कराएंगे। पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएगी। बसपा के आगरा जोन कोआर्डिनेटर हेमेंद्र मौर्य ने भी इस्तीफे की मांग की है।
हिंदी में फेल और इसी के प्रोफेसर : अंजुला
फर्जी मार्कशीट प्रकरण पर विरोधी भी सक्रिय हो गए हैं। कभी भाजपा में रही आगरा की पूर्व मेयर अंजुला सिंह माहौर ने कहा कि यह कैसी विडंबना है कि जो व्यक्ति हिंदी में फेल हुआ वह हिंदी का प्रोफेसर बन गया। अब उन्हें भाजपा ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय में राज्यमंत्री बना दिया। कठेरिया को नैतिकता के तौर पर इस्तीफा देना चाहिए। मोदी जी को मंत्रालयों में स्वच्छता अभियान चलाना चाहिए। गौरतलब है कि अंजुला माहौर ने कठेरिया से विवाद के चलते ही भाजपा छोड़ी थी। मेयर इंद्रजीत आर्य के समीकरण प्रो. कठेरिया से नहीं बने। उन्होंने भी भाजपा से अलग हो सपा का दामन थामा।
दोष सिद्ध तो इस्तीफा : कठेरिया
मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री बनते ही प्रो. रामशंकर कठेरिया के खिलाफ गड़े मुर्दे खड़े हो गए हैं। उनका कहना है कि मायावती सरकार में सत्ता का दुरुपयोग कर मुकदमे दर्ज कराए गए थे। उन्होंने 2009 में बसपा प्रत्याशी कुंवर चंद वकील के आरोपों को भी खारिज किया है। कहा कि सत्ता के दबाव में एक फर्जी पत्र की फोटोप्रति जोकि तत्कालीन कुलसचिव वीके सिन्हा के लेटरपैड बनाया गया था को लगाकर एफआईआर कराई गई थी। उन्होंने कहा कि मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि मैं आज भी डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में उपाचार्य के पद कार्यरत हूं। उन्होंने ऐलान किया कि मेरे विरुद्ध लगाया गया कोई भी आरोप सिद्ध होता है तो मैं उपाचार्य और मंत्री पद और अन्य विभागों से इस्तीफा देने को तैयार हूं।
हर तरफ कठेरिया की चर्चा
प्रो रामशंकर कठेरिया की एमए की फर्जी मार्कशीट प्रकरण की चर्चा हर किसी की जुबान पर है। मीडिया में मामला उछलने के बाद शुक्रवार को डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय में छात्र और शिक्षक यह जानने को बेताब थे कि अब इस मामले में होगा क्या? मंत्रीजी के संस्थान केएमआई में यूं तो सन्नाटा था, लेकिन यहां मौजूद दो शिक्षक मंत्रीजी के कॅरियर पर गंभीर चिंतन-मनन में तल्लीन दिखे। कुछ लोगों का कहना है कि प्रो. कठेरिया को फंसाया जा रहा है। वहीं विवि परिसर के दूसरे कोने में कुछ कर्मचारी दावा करते हुए कह रहे थे, हमें पता है कि किस तरह यह थर्ड डिवीजन के नंबर सेकेंड डिवीजन में बदले। इतना ही नहीं कई ने तो प्रो. कठेरिया के मंत्री पद की उम्र भी तय कर दी। हालांकि एक कर्मचारी ने यह कहा कि काम पक्का है, खतरे की कोई बात नहीं है।
कठेरिया के खिलाफ परिवाद दर्ज
हाईकोर्ट बेंच आगरा में स्थापित करने संबंधी बयान पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री प्रो. रमा शंकर कठेरिया के खिलाफ शुक्रवार को मेरठ कोर्ट में परिवाद दर्ज हो गया। कोर्ट ने वादी के बयानों के लिए 20 नवंबर की तारीख तय की है। कठेरिया के बयान को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं में आक्रोश है। इसका विरोध करते हुए यूपी बार कौंसिल के सदस्य और मेरठ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल कुमार बख्शी ने सीजेएम कोर्ट में कठेरिया के खिलाफ परिवाद दायर कर दिया। कोर्ट में उन्होंने कहा कि ने वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच को लेकर अफवाह फैलाई है। इसे लेकर पूरे क्षेत्र में तनाव है। कोर्ट ने परिवाद स्वीकार करते हुए पंजीकृत करने के आदेश दे दिए हैं।
आरोप साबित हुए तो दे दूंगा इस्तीफा: कठेरिया
केंद्र की मोदी सरकार में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री बनाए गए आगरा से सांसद रामशंकर कठेरिया की शैक्षिक योग्यता का विवाद बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दलों के निशाने पर आए कठेरिया का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और यदि उन्हें दोषी पाया गया तो वह न केवल मंत्री पद बल्कि सांसदी से भी इस्तीफा दे देंगे। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने उनके बहाने प्रधानमंत्री पर हमला बोला है। कांग्रेस ने मोदी से पूछा है कि आखिर उन्होंने क्या देख कर ऐसे मंत्रियों को शिक्षा विभाग का दायित्व दिया है, जिनकी खुद की पढ़ाई सवालों के घेरे में है।
अपने खिलाफ लग रहे फर्जी अंकपत्र के आरोपों में सफाई देते हुए कठेरिया ने कहा कि पूर्ववर्ती बसपा सरकार उनके खिलाफ जानबूझकर हर रोज चार मामले दायर करती थी। उन्हें कोई सबूत नहीं मिला। बसपा सरकार के सत्ता में रहने के बावजूद उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। उन्हाेंने 2009 में बसपा प्रत्याशी रहे कुंवर चंद वकील के आरोपों को भी खारिज किया है।
कठेरिया कहा कि सत्ता के दबाव में एक फर्जी पत्र की फोटो प्रति जोकि तत्कालीन कुल सचिव वीके सिन्हा के लेटरपैड बनाया गया था, को लगाकर एफआईआर कराई गई थी। उन्होंने कहा कि मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। उन्होंने कहा कि वह आज भी डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में उप प्राचार्य के पद पर कार्यरत हूं। बसपा उम्मीदवार ने 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक मामला दायर किया था। जिसमें उन पर अंकपत्र में जालसाजी का आरोप लगा था। अदालत में अभी मामला चल रहा है। कठेरिया पर आरोप है कि उन्होंने हिंदी के साथ अंग्रेजी के अंकों में भी छेड़छाड़ की।
कांग्रेस ने उनकी अंकपत्र की कॉपी पेश करते हुए उनसे अपनी शैक्षिक योग्यता की डिग्री दिखाने के लिए कहा है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने चुटकी लेते हुए कहा कि मंत्री ने डिग्री लेने के लिए अंकपत्र में खुद ही नंबर लिख दिए। खुर्शीद ने कटाक्ष के अंदाज में कहा कि कठेरिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया की अवधारणा को साकार किया।
इतना ही नहीं कठेरिया के खिलाफ लगे अन्य मामले भी अब उठाए जाने लगे हैं। उनके खिलाफ अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर चुनाव लड़ने, मारपीट, बलवा और सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस के साथ गालीगलौज करने के भी मामले दर्ज हैं। इन सभी मामलों में अगले कुछ दिनों में सुनवाई होनी है। इस बीच शुक्रवार को मेरठ में उनके खिलाफ एक परिवाद दर्ज हुआ है। यह परिवाद हाईकोर्ट बेंच आगरा में स्थापित किए जाने को लेकर दर्ज हुआ है। उनके बयान को लेकर पश्चिमी यूपी के वकीलों में आक्रोश है।