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महाराष्ट्र में बीजेपी खेल रही माइंड गेम?

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महाराष्ट्र के चुनावी महाभारत में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा ने सरकार गठन के लिए अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। साथ ही शिवसेना की ओर से भी भाजपा को समर्थन की पहल नहीं किए जाने को लेकर प्रदेश में सरकार गठन पर सस्पेंस बरकरार है।
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शिवसेना की शर्तें न माननी पड़ें, इसके लिए भाजपा ने उसके साथ माइंडगेम खेलना शुरू कर दिया है। भाजपा आलाकमान को सरकार बनाने की अभी कोई जल्दी नहीं है और राज्य में दीपावली के बाद सरकार का गठन हो सकता है।

राज्य में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, इसलिए उसे पता है कि सरकार बनाने का पहला हक उसका है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेता शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाना चाहते हैं लेकिन उसकी शर्तें मानने के लिए तैयार नहीं हैं।
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चुनाव नतीजे आने के बाद भाजपा संसदीय बोर्ड ने रविवार को ही गृहमंत्री राजनाथ सिंह को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी सौंपी थी। सोमवार को उनका प्रस्तावित मुंबई दौरा भी टल गया।

भाजपा नेता विनोद तावड़े ने कहा कि राजनाथ सिंह की मुंबई यात्रा की नई तारीख का ऐलान बाद में होगा। इससे साफ है कि भाजपा को सरकार बनाने की कोई जल्दबाजी नहीं है।

दीपावली बाद महाराष्ट्र में नई सरकार!

इस बीच सोमवार को मुंबई स्थित भाजपा कार्यालय में नवनिर्वाचित विधायकों का स्वागत किया गया लेकिन सरकार गठन पर कोई चर्चा नहीं हुई। उधर, शिवसेना के विधायकों की भी बैठक हुई, जिसमें विधायक दल का नेता चुनने का पूरा अधिकार पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को सौंप दिया गया।

शिवसेना की बैठक में भाजपा से गठबंधन को लेकर कोई विशेष चर्चा नहीं हुई। शिवसेना का कहना है कि वह हर स्थिति के लिए तैयार है लेकिन अपने पत्ते नहीं खोल रही है।

सूत्रों के मुताबिक शिवसेना सरकार बनाने के लिए भाजपा को समर्थन देने के लिए तैयार है लेकिन उसकी कुछ शर्तें हैं। इसके चलते भाजपा जल्दबाजी के पक्ष में नहीं है। सूत्रों के अनुसार रविवार को उद्धव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन कर जीत की बधाई दी थी। उन्होंने मोदी से बीती बात भूलने और आगे बढ़ने की बात भी कही थी। इसके अलावा उद्धव ने महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष देवेंद्र फडनवीस और चुनाव प्रभारी ओम माथुर को भी बधाई दी थी।

उद्धव की इन कोशिशों के बावजूद भाजपा अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि शिवसेना का समर्थन लेना है या नहीं। हालांकि भाजपा के अधिकतर नेता एनसीपी का समर्थन लेने के बजाय शिवसेना का समर्थन लेने के पक्ष में है लेकिन इस पर अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान को करना है।

एनसीपी विधायक दल के नेता बने अजीत पवार

सोमवार को एनसीपी के नवनिर्वाचित विधायकों ने पूर्व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार को विधायक दल का नेता चुना। नेता चुने जाने के बाद अजीत ने कहा कि हम मोदी के डर के कारण भाजपा को समर्थन नहीं दे रहे हैं।

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा कि हम महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा नहीं बनना चाहते इसलिए स्थिर सरकार के लिए बाहर से भाजपा को समर्थन देंगे।

कांग्रेस का शिवसेना को सरकार बनाने का प्रस्ताव
राज्य में सरकार गठन को लेकर जारी सस्पेंस के बीच अजीत पवार ने एक और खुलासा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने शिवसेना के नेतृत्व में नई सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया है।

कांग्रेस-एनसीपी के समर्थन से शिवसेना की सरकार बनाने के लिए आए प्रस्ताव के  तहत कांग्रेस 42, एनसीपी 41 और शिवसेना 63 मिलकर बहुमत की सरकार बन सकती है लेकिन यह सरकार स्थायी नहीं होगी, इसलिए हमने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
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निर्दलीय विधायकों को पटाने में जुटी भाजपा

भाजपा को सरकार बनाने के लिए नवनिर्वाचित सात निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिल सकता है। निर्दलियों को अपने पाले में लाने के लिए भाजपा नेताओं ने जुगत भिड़ाना शुरू कर दिया है।

राज्य की 288 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 123 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि बहुमत का जादुई आंकड़ा 145 है। सात निर्दलियों का समर्थन हासिल होने पर भाजपा की संख्या 130 पहुंच जाएगी। उसके बाद सिर्फ 15 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी।

भोसरी से चुनाव जीते महेश भोसरे, परभणी जिले के पाथरी के विधायक मोहन फड, अमरावती के बच्चू कडू भाजपा को समर्थन देने को तैयार हैं। योग गुरु बाबा रामदेव के समर्थक रविराणा भी भाजपा के पाले में जा सकते हैं।

इसके अलावा कल्याण के गणपत गायकवाड़, शिरीष चौधरी का भी समर्थन भी भाजपा को मिलना तय है। इस बीच बहुजन विकास आघाड़ी के अध्यक्ष हितेंद्र ठाकुर ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की है। इसके तीन विधायक हैं।
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