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नहीं मानी शिवसेना, भाजपा के खिलाफ उतारे प्रत्याशी

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महाराष्ट्र में भाजपा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चुनावी रण में उतरने का दावा करने वाली शिवसेना उत्तर प्रदेश और बिहार में भाजपा से ही मुकाबला करती नजर आएगी।
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शुक्रवार को शिवसेना की ओर से उत्तर प्रदेश की 20 और बिहार की 5 सीटों पर प्रत्याशी खड़े करने का ऐलान किया गया है।

इस मामले में पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत का कहना था कि हमारा और भाजपा का गठबंधन महाराष्ट्र में है। यूपी और बिहार में किसी तरह का गठबंधन नहीं है। शिवसेना अपनी पार्टी का विस्तार चाहती है इसीलिए हम यूपी-बिहार के अलावा दिल्ली पंजाब और केरल की कुछ सीटों पर भी अपने प्रत्याशी उतार रहे हैं।

मोदी और राजनाथ के खिलाफ प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला

इस मामले में शुरुआत में खबरें आईं कि शिवसेना वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ और लखनऊ में राजनाथ सिंह के खिलाफ भी उम्मीदवार खड़े करने की तैयारी में है। इससे भाजपा में हड़कंप मच गया।

हालांकि थोड़ी देर बाद शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने ट्वीट कर जानकारी दी कि ऐसा नहीं होने जा रहा है।

आदित्य ने ट्वीट में लिखा कि जो लोग यह मजाकिया अफवाह फैला रहे हैं मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि शिवसेना लखनऊ-वाराणसी में उम्मीदवार नहीं खड़ी कर रही। आदित्य के इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने राहत की सांस ली।
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गडकरी-राज की मुलाकात से तल्‍ख हो गए हैं दोनों दलों के रिश्ते

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे के मेल जोल ने भाजपा-शिवसेना के रिश्तों में तल्खियां पैदा कर दी हैं, जिनकी सुगबुगाहट अभी तक जारी है।

शिवसेना सूत्रों की मानें तो अगर ये विवाद न होता तो इस बार चुनावी रुख को देखते हुए शिवसेना महाराष्ट्र के बाहर प्रत्याशियों के चयन में नरमी बरत सकती थी। लेकिन फिलहाल शिवसेना भाजपा को ये संकेत देना चाहती है कि वो कहीं से भी कमजोर नहीं है।

हालांकि 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में भी शिवसेना की ओर से यूपी, बिहार और दूसरे राज्यों में अपने प्रत्याशी उतारे गए थे लेकिन सभी जगहों पर शिवसेना प्रत्याशियों को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
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