रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि से मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों के लिए भोजन बनाने के खर्च में 653 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ गया है। रसोई गैस के महंगे होने के कारण स्कूलों को बढ़े हुए खर्च के भुगतान को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं हो सका है।
उल्लेखनीय है कि पिछले महीने पेट्रोलियम मंत्रालय ने सब्सिडी वाली रसोई गैस पर साल में छह सिलेंडर पर कैप लगाते हुए अतिरिक्त सिलेंडरों को बाजार दर पर बेचे जाने का फैसला लिया था। मिड-डे मील के लिए प्रतिदिन हजारों की संख्या में गैस सिलेंडर इस्तेमाल किए जाते हैं। छह सिलेंडर से ज्यादा सिलेंडरों के बाजार भाव पर खरीदे जाने के लिए इस योजना के तहत 653 करोड़ का अतिरिक्त भार आएगा।
मिड-डे मील को रियायती दरों पर ही गैस सिलेंडर दिए जाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्री ने पेट्रोलियम मंत्रालय को पत्र लिखा था किंतु पेट्रोलियम मंत्रालय ने इसे स्वीकार नहीं किया। एचआरडी मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय एवं पीएमओ स्तर पर भी इस मामले में बातचीत कर रहा है। मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू ने कहा कि वे गैस की बढ़ी कीमतों के कारण मिड-डे मील की गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी नहीं आने देंगे।