पूरी दुनिया में बढ़ते हुए साइबर क्राइम को देखते हुए एफ.बी.आई. और माइक्रोसॉफ्ट ने हाथ मिलाया है। ये जोड़ी अब दुनिया के 80 से भी अधिक देशों में एक साथ काम करेगी ताकि साइबर क्राइम पर नकेल कसी जा सके।
माइक्रोसॉफ्ट ने आधिकारिक तौर पर बताया कि इस संबंध में कि कंपनी की डिजिटल यूनिट ने बुधवार को लगभग 1400 खतरनाक साइबर क्राइम से जुड़े नेटवर्क खत्म किए।
अब तक अमेरिकन एक्सप्रेस, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटीग्रुप, बैंक ऑफ कनाडा के कम्प्यूटरों सहित लगभग 5 मिलियन कम्प्यूटर्स साइबर क्राइम के चलते डैमेज हो चुके हैं।
अंर्तरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले इन अपराधों के लिए जिम्मेदार नेटवर्क की पहचान न होने के कारण जांच में परेशानी का सामना करना पड़ता है। उम्मीद की जा रही है कि अलग-अलग देश आपस में तालमेल बिठा कर साइबर क्राइम को भविष्य में कम कर सकेंगे।
माइक्रोसॉफ्ट की डिजिटल टीम ऐसे सॉफ्टवेयर पर काम करने जा रही है जो पर्सनल कम्प्यूटर पर लगातार इस बात का ध्यान रखती है कि कोई वायरस या स्पैम उनके सिस्टम को डैमेज न करे।
माइक्रोसॉफ्ट जिस ऑपरेशन पर काम करने जा रही है वह 'सिटेडल' के नाम से जाना जाता है। इस समय यूरोप, भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में 'सिटेडल' का पाइरेटेड वर्जन कम्पयूटरों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एफ.बी.आई के असिस्टेंट डायरेक्टर रिचर्ड मैकफ्ली ने कहा 'हम सिटेडल बोटनल को बनाने और बांटने के लिए के लिए लगातार काम कर रहे हैं'।