बच्चों के लिए चिल्ड्रन्स डे, टीचर्स के लिए टीचर्स डे, महिलाओं के लिए वुमैन्स डे, मां के लिए मदर्स डे, पिता के लिए फादर्स डे, प्रेमी जोड़ों के लिए वैलेंटाइन्स डे हो सकता है तो पुरूषों के लिए मैन्स डे क्यों नहीं हो सकता?
आदमी बेचारा रात-रात भर जाग कर बच्चों के डायपर बदलता है, घर के टॉयलेट साफ करता है, घर की जिम्मेदारियां उठाता है, बीवी की मदद करता है, लेकिन क्या उसे वह इज्जत मिलती है जिसका वह हकदार है?
सवाल ये भी हैं कि क्या पुरूष हमेशा खराब ही होता है? क्या वो हमेशा धोखेबाज होता है? क्या वो हमेशा हिंसक होता है? क्या वो हमेशा लापरवाह होता है?
लड़के को हमेशा ये सिखाया जाता है कि रोते नहीं हैं और वो बिना रोए, बिना थके, बिना रुके, बिना शिकायत किए काम करता है। क्या वो थोड़ी भी इज्जत का हकदार नहीं?
सवाल और भी कई हैं लेकिन पहले देखिए ये वीडियो-
अब वक्त आ गया है जब ये समझा जाना चाहिए कि मर्द को भी दर्द होता है और वो हर्क्यूलस नहीं है। वह भी बाकी इंसानों की तरह एक इंसान है और इज्जत का हकदार भी है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंटरनेश्नल मैन्स डे 19 नवंबर को मनाया जाता है। यदि आपको भी ऐसा लगता है कि मर्द इज्जत का हकदार है तो शेयर करें इस खबर को।
आपका शेयर करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना मैन्स डे पर नीले रंग के कपड़े पहनना।