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मरने से पहले मां ने बेटे को बताया हैरान करने वाला सच

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यूं तो यह कहानी पूरी फिल्मी है, लेकिन है सोलह आने सच। बात करीब 15 साल पहले की है जब एक आदमी को साढ़े तीन साल का बच्चा लावारिस हालत में रोता-बिलखता मिला।
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आदमी से उस बच्चे का दुख-दर्द देखा ना गया और वो उसे अपने साथ अपने घर ले गए। उन्होंने उसे पढ़ा-लिखा कर ग्रेजुएट बनाया।

उन्होंने अपने दोनों पुत्रों की तरह ही उसे अपनी संपत्ति का वारिस भी बनाया। मरने के पहले व्यक्ति की पत्नी ने युवक को सच्चाई बताई।

अब वह दर-दर अपने असली मां-बाप को तलाश रहा है। बुधवार को उसने पुलिस से मां-बाप को ढूंढने की गुहार लगाई।

अपने बेटे की तरह पाला रवि को

मेरठ के अझौता निवासी स्व. जयचंद पुत्र मिरची और उनकी धर्मपत्नी स्व. धर्मवीरी को नमन, जिन्होंने रवि को आसमान के सूरज की तरह चमकाया।

जयचंद मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में नौकरी करते थे। 15 साल पहले वे गाजियाबाद गए थे। वहां उन्हें एक साढ़े तीन साल का बच्चा रोते-बिलखते मिला।

जयचंद उसे देखकर ठिठक गए और बच्चे से उसके मां-बाप के बारे में पूछने लगे, लेकिन वह कुछ नहीं बता पाया। इस पर वे उस बच्चे को अपने साथ ले आए और नाम दिया रवि।

इसके बाद उन्होंने अपने दोनों बच्चों के साथ रवि की भी परवरिश शुरू की। उन्होंने कभी रवि को अपने बच्चे कम नहीं समझा।
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अपने असली मां-बाप को तलाश रहा है रवि

जयचंद ने उसके नाम डेढ़ बीघा जमीन भी कर दी है। इस बीच 2009 में जयचंद की मौत हो गई। इसके बाद उनकी पत्नी धर्मवीरी ने पूरी जिम्मेदारी निभाई।

आज रवि पढ़-लिखकर ग्रेजुएट हो चुका है और उसकी उम्र 19 साल है। अब शायद भगवान को यही मंजूर था। 2012 में जयचंद की पत्नी धर्मवीरी की भी मौत हो गई, लेकिन मरने से पहले धर्मवीरी ने रवि को उसके मिलने की पूरी कहानी बताई।

अब रवि अपने असली माता-पिता को तलाश रहा है। रवि के अनुसार उसे कोई परेशानी है, लेकिन वह असली मां-बाप से मिलना चाहता है।

वह अब तक कई बार गाजियाबाद भी जा चुका है, लेकिन अभी तक उसे सफलता नहीं मिली है। बुधवार को उसने दौराला थाने पहुंचकर पुलिस से मां-बाप को ढूंढने की गुहार लगाई। पुलिस ने उसे आश्वासन दिया है।
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