बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को केंद्र ने बार-बार आग्रह के बावजूद स्वीकार नहीं किया। मंडी और बिलासपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि एससी, एसटी और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था को नए कानून बनाकर खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। इन वर्गों के कोटे में अन्य जातियों को शामिल किया जा रहा है।
मायावती ने यहां चुनावी सभाओं में कहा कि बसपा ने अपर कास्ट के लोगों को आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए केंद्र को बार-बार चिट्ठियां लिखीं। मगर केंद्र में किसी भी पार्टी की सरकार ने इसके लिए ठोस कदम नहीं उठाए। सवर्ण जाति के लोगों की स्थिति भी ठीक नहीं है। उन्होंने सवर्णों को उत्तर प्रदेश में बसपा ने आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया था। हिमाचल में सत्ता मिली तो यहां भी ऐसा ही होगा।
मायावती ने कहा कि कांग्रेस-भाजपा की गलत नीतियों से महंगाई बढ़ी है। गरीब और बेरोजगारी से ही नक्सलवाद और माओवाद पनप रहा है। हिमाचल की भाजपा सरकार पर बरसते हुए मायावती ने कहा कि यहां केंद्र की योजनाओं को सही ढंग से लागू नहीं किया गया। इसके लिए कांग्रेस और भाजपा जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल के विकास को बसपा की सरकार लाना जरूरी है। बहुमत नहीं मिला तो कम से कम इतने विधायक जीतने चाहिए कि सत्ता की चाबी बसपा के हाथ रहे।