मुजफ्फरनगर दंगों के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी समीकरणों को तेजी से बदलता देख अब बसपा प्रमुख मायावती ने भी अपनी सक्रियता तेज कर दी है।
मायावती ने सपा सरकार पर सियासी हमले तेज करते हुए अब राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का दरवाजा खटखटाया है।
मायावती ने सरकार पर दंगों के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह से असफल रहने का आरोप लगाते हुए सूबे में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। मायावती ने शुक्रवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने कहा कि सपा के उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के बाद सूबे की कानून व्यवस्था खराब हो गई है और प्रदेश में जंगल राज फैल गया है।
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मायावती ने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से सांप्रदायिक हिंसा के दर्जनों मामले सामने आए हैं। मुजफ्फरनगर हिंसा इसका एक स्पष्ट उदाहरण है।
राष्ट्रपति भवन के बाहर उन्होंने पत्रकारों से कहा कि लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए संविधान के अनुच्छेद 356 लागू कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सख्त जरूरत है। प्रदेश में गुंडा राज कायम हो गया है।
माया ने आरोप लगाया कि सरकार मुजफ्फरनगर हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह से असफल रही है। सरकार अपना कर्त्तव्य निभाने में नाकाम रही है।
मायावती ने कहा कि शरणार्थी स्थलों में विस्थापित लोगों में दुबारा विश्वास जगाने की जरूरत है। मगर सरकार इसमें भी पूरी तरह से असफल रही है।
लोग अपने घरों में वापस लौटने को तैयार नहीं है। अभी भी दहशत का माहौल है। मगर सपा सरकार हाथ पर हाथ रखकर बैठी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दंगों को काबू करने के बजाय हिंसा पर सपा राजनीति कर रही है। हिंसा भड़काने के नाम पर भाजपा और बसपा नेताओं को गिरफ्तार कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कांग्रेस और सपा के उन मुस्लिम नेताओं को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया। जो बसपा नेताओं के साथ महापंचायत में शामिल हुए थे। सपा सरकार गुंडागर्दी कर रही है।