पांच साल पूर्व धर्म परिवर्तन कर अरुण से मुजस्सम बने एक मौलाना ने तहसील से एससी का प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया है। मुजस्सम ने पता भी अपने गांव बधाई कलां का ही दिया है। जांच के बाद तहसील ने एससी का प्रमाण-पत्र जारी करने से इंकार कर दिया है। मौलाना का दावा है कि दलित समाज में पैदा होने के कारण उसे इसका प्रमाण-पत्र मिलना चाहिए।
चरथावल क्षेत्र के गांव बधाईकलां के सुखपाल के बेटे अरुण ने लगभग पांच वर्ष पूर्व इस्लाम धर्म अपना लिया था। उसने अपना नाम भी मुजस्सम रख लिया। यही नहीं उसने वेश भी मौलाना का धारण कर लिया है। अब लंबी दाढ़ी और टोपी उसकी पहचान हो गई है। मुजस्सम गांव छोड़कर इस समय चरथावल के एक मदरसे में रह रहा है।
हाल ही में चुनाव की सरगर्मी शुरू हुई तो उसे किसी मौलाना ने कहा कि उसका गांव एससी में आरक्षित हो सकता है। यदि वह ग्राम प्रधान चुनाव लड़ा तो मुस्लिमों का वोट एकतरफा मिल जाएगा। संभावित प्रत्याशी बनने की तैयारी को लेकर अरुण उर्फ मुजस्सम ने जनवाणी केंद्र के माध्यम से अनुसूचित जाति के प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया। उसने अपना पता भी बधाईकलां गांव का ही दिया।