मंगलयान से धरती तक जानकारी पहुंचने में करीब साढ़े बारह मिनट का समय लग रहा है। सुबह लगभग आठ बजे इसरो को मंगलयान से सिग्नल प्राप्त हुआ और ये सुनिश्चित हो पाया कि मंगलयान मंगल की कक्षा में स्थापित हो गया है। भारत दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने पहले ही प्रयास में अपना मंगल अभियान पूरा कर लिया।
इस ऐतिहासिक घटना का गवाह बनने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैंगलोर के इसरो केंद्र में मौजूद रहे। इसरो के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा, "आज इतिहास बना है। हमने लगभग असंभव कर दिखाया है। मैं सभी भारतीयों और इसरो वैज्ञानिकों को मुबारक देता हूं। कम साधनों के बावजूद ये कामयाबी वैज्ञानिकों के पुरुषार्थ के कारण मिली है।"
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी ट्विटर पर इसरो को बधाई दी है। भारत ने इस मिशन पर करीब 450 करोड़ रुपए खर्च किए है, जो बाकी देशों के अभियानों की तुलना में सबसे ज्यादा क़िफ़ायती है।
क्या मिलेगा मंगलयान से?
अगर सब ठीक रहा तो मंगलयान छह महीनों तक मंगल ग्रह के वातावरण का अध्ययन करेगा। ये मीथेन गैस का पता लगाएगा, साथ ही रहस्य बने हुए ब्रह्मांड के उस सवाल का भी पता लगाएगा कि क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं?
ये भी अनुमान है कि कक्षा में स्थापित होने के कुछ ही घंटों में यान एक भारतीय आंख द्वारा मंगल ग्रह की ली गई तस्वीरें भेजना शुरू कर देगा।
इसी के साथ भारत एशिया ही नहीं दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जिसने पहले ही प्रयास में अपना मंगल अभियान पूरा कर लिया।