एक मुसलिम लड़के द्वारा धर्म परिवर्तन कर हिंदू लड़की से शादी करने को मद्रास हाईकोर्ट ने अवैध करार दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि धर्म परिवर्तन का मकसद शादी को आसान बनाना भर है, जो कानून की नजर में अवैध है।
न्यायाधीश सी कुरिअकोस और न्यायाधीश मैथ्यू पी जोसफ की पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि लड़की बालिग है और जब तक उसकी शादी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत नहीं हो जाती है तब तक वह लड़की अपने माता-पिता के घर रह सकती है।
विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने एक मुसलिम लड़के का धर्म परिवर्तन कराने के बाद हिंदू लड़की से करवाई थी। इतना ही नहीं वीएचपी ने उस लड़के को धर्मांतरण सर्टिफिकेट भी दिया था और मैरिज सर्टिफिकेट प्रसिद्घ मंदिर कलूर की तरफ से जारी किया गया था। जब यह मामला हाईकोर्ट के समक्ष आया तो कोर्ट ने शादी के लिए धर्म परिवर्तन को मानने से इनकार कर दिया। पीठ ने अपने आदेश में दंपति से कहा कि उन्हें शादी स्पेशल मैरिज एक्ट के मुताबिक रजिस्टर करवानी होगी।
गौरतलब है कि कोल्लम जिले के शैजू एम ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी अश्वाथी रवींद्रन को उसके चाचा और पिता ने घर में बंद कर रखा है। कोर्ट के निर्देश के बाद अश्वाथी को बुलाया गया। अश्वाथी ने कोर्ट को बताया कि उसने 14 नवंबर को कलूर के श्री महादेव मंदिर में शैजू से शादी की थी। शादी से पहले शैजू को वीएचपी के लोगों ने इसलाम से हिंदू धर्म में परिवर्तन करवाया था।
अश्वाथी के पिता के रवींद्रन ने कहा कि शैजू रातों रात मुसलमान से हिंदू बन गया। रवींद्रन ने दो परिवारों के बीच सामाजिक और आर्थिक असमानता का भी हवाला दिया। कोर्ट ने पूरा मामला सुनने के बाद कहा कि हम इस तरह के धर्मांतरण पर भरोसा नहीं कर सकते। वह भी तब जब किसी संगठन (वीएचपी) ने करवाया हो। शैजू ने कोर्ट से कहा कि हम स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी के लिए तैयार हैं।